सुनंदा पुष्कर मौत मामला: कोर्ट ने दिया आदेश- केस के दस्तावेज तीसरे व्यक्ति से नहीं होंगे साझा

हाई प्रोफाइल सुनंदा पुष्कर मौत मामले से जुड़े किसी भी दस्तावेज को किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाएगा. मामले में दिल्ली के रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को यह आदेश दिया है.

News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 6:51 PM IST
सुनंदा पुष्कर मौत मामला: कोर्ट ने दिया आदेश- केस के दस्तावेज तीसरे व्यक्ति से नहीं होंगे साझा
सुनंदा पुष्कर मर्डर: मामले के दस्तावेज को तीसरे व्यक्ति के साथ नहीं किया जाएगा साझा. (फाइल फोटो)
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Updated: July 18, 2019, 6:51 PM IST
हाई प्रोफाइल सुनंदा पुष्कर मौत मामले से जुड़े किसी भी दस्तावेज को किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं किया जाएगा. सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में दिल्ली के रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को यह आदेश दिया है. कोर्ट ने साथ ही कहा है कि इस केस से जुड़े तीसरे पक्ष को चार्जशीट और दूसरे पक्ष को डाक्यूमेंट भी नहीं दिया जाएगा. कोर्ट 20 और 22 अगस्त को कांग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ आरोपों पर बहस शुरू करेगा.

सुनंदा पुष्कर मौत  मामले की टाइमलाइन

15 जनवरी 2014: सुनंदा पुष्कर ने होटल लीला पैलेस के कमरा नंबर 307 में चेक-इन किया. वह काफी तनाव में लग रहीं थीं.

16 जनवरी 2014: इस कमरे में कुछ समस्या होने पर अगले ही दिन यानी 16 जनवरी को सुनंदा ने कमरा बदला और दोनों (शशि और सुनंदा) कमरा नंबर 345 में दोनों चले गये.

17 जनवरी 2014: कांग्रेसी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के आने पर सुईट नंबर 354 में शिफ्ट हुई. इसी दिन सुनंदा की मौत हो गई. एसडीएम जांच बैठाई गई और मामले की जांच शुरू की गई. कमरा नंबर 345 में सुनंदा का शव मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने देखा कि कमरे में और सुनंदा के बिस्तर के आसपास कई तरह की दवाइयां, दवाइयों की पैकिंग आदि पड़ी हुई थीं.

घटनास्थल पर पुलिस पहुंची तो देखा गया कि सुनंदा के मृत शरीर पर चोटों के करीब 15 निशान थे. हाथ पर काटे जाने का निशान भी था. हालांकि ये सभी चोटों के निशान जानलेवा नज़र नहीं आ रहे थे. फिर भी इन चोटों के कारण एक सवाल यह ज़रूर उठ खड़ा हुआ कि क्या मौत से पहले सुनंदा किसी तरह के फिज़िकल असॉल्ट का शिकार हुईं.

18 जनवरी 2014: शव के पोस्टमार्टम के लिए एम्स में मेर्डिकल बोर्ड गठित किया गया. प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि पुष्कर की आकस्मिक और अप्राकृतिक मौत हुई है. पुलिस ने जांच शुरू की. थरूर, सुनंदा के बेटे व अन्य लोगों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए.
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19 जनवरी 2014: केरल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के निदेशक डॉ. जी विजयराघवन ने मीडिया में बयान दिया कि सुनंदा को ऐसी गंभीर बीमारी नहीं थी, जिससे उनकी जान चली जाती. इस इंस्टीट्यूट में सुनंदा ने 12 से 14 जनवरी तक अपना इलाज कराया था.

सुनंदा पुष्कर और शशि थरूर (फाइल फोटो)


21 जनवरी 2014: एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में मौत का कारण जहर बताया. एसडीएम आलोक शर्मा ने पुलिस को हत्या, खुदकशी के दृष्टिकोण से जांच करने की बात कही.

23 जनवरी 2014: मामला क्राइम ब्रांच को दिया गया, लेकिन क्राइम ब्रांच ने केस लेने से मना कर दिया.

22 मार्च 2014: फॉरेंसिक विभाग ने विसरा रिपोर्ट जारी कर बताया कि मौत का कारण जहर नहीं था. पुलिस ने फिर रिपोर्ट को एम्स भेजा। पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने कहा कि शशि थरूर को क्लीनचिट नहीं दी गई है.

29 जून 2014: एम्स के फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने हलफनामे में कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है.

2 जुलाई 2014: एम्स ने डॉ. सुधीर गुप्ता के आरोपों का खंडन किया और स्वास्थ्य मंत्री को रिपोर्ट सौंपी. पुलिस आयुक्त ने गृहमंत्री को भी इसकी जानकारी दी.

6 जनवरी 2015: पुलिस आयुक्त ने मीडिया को दिए बयान में हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज करने की जानकारी दी.

फरवरी 2015: पुष्कर के वीसरा नमूने वाशिंगटन की एफबीआई प्रयोगशाला में जहर की परीक्षा और पहचान के लिए भेजे गए.

12 मार्च 2015: बी एस बस्सी ने कहा कि मामले में महर तारार एक महत्वपूर्ण लिंक है और जांच में शामिल होने के लिए उन्हें कहा जाएगा. तारार का कहना है कि जब भी बुलाया जाता है तो वह पुलिस की मदद करने के लिए तैयार है.

10 नवंबर 2015: दिल्ली पुलिस को एफबीआई से पुष्कर की वीसरा रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट में कहा गया है कि पुष्कर के वीसरा नमूने में विकिरण अनुमत स्तर के भीतर था और उसकी मृत्यु का कारण नहीं था.

नवंबर 2015: दिल्ली पुलिस पत्रकार नलिनी सिंह से पूछताछ करती हैं, जो जांच के लिए पुष्कर से बात करने वाले अंतिम व्यक्तियों में से एक थी. पुष्कर ने सिंह से अपने पति और तारार के बीच बीबीएम संदेशों को दोबारा प्राप्त करने में मदद करने के लिए कहा था.

मार्च 2016: तारार दिल्ली आती हैं, एक वरिष्ठ अधिकारी से मिलती हैं और पुष्कर की हत्या के बारे में कोई जानकारी नहीं देती.

19 अगस्त, 2017: फोरेंसिक टीम और सबूत इकट्ठा करने के लिए होटल होटल लीला पैलेस के कमरे में गई

सुनंदा पुष्कर (फाइल फोटो)


30 अगस्त, 2017: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनंदा पुष्कर की मौत की जांच में देरी के लिए पुलिस को फटकारा रिपोर्ट की मांग की

21 सितंबर, 2017: दिल्ली पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट पर जांच समाप्त करने के लिए 8 अतिरिक्त सप्ताह मांगे

16 अक्टूबर, 2017: दिल्ली पुलिस ने लीला पैलेस होटल के कमरे को खोला जिसमें सुनंदा पुष्कर मृत पाई गई थी

23 फरवरी, 2018: सर्वोच्च न्यायालय ने शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत की एसआईटी जांच की मांग के लिए सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया मांगी

14 मई 2018: सुनंदा पुष्कर की मौत के चार साल बाद दिल्ली पुलिस ने 14 मई को पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट फाइल की. आईपीसी की धारा 306 और 498(A) के तहत दायर चार्जशीट में सुनंदा के पति और कांग्रेस नेता शशि थरूर को संदिग्ध बनाया गया है. चार्जशीट के मुताबिक, थरूर संदेह के दायरे में हैं लेकिन उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

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First published: July 18, 2019, 5:42 PM IST
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