ARTICLE 370 को लेकर दोषपूर्ण याचिकाएं दायर होने पर SC ने नाराजगी व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट (SUPREME COURT) ने संविधान के आर्टिकल 370 (ARTICLE 370) के प्रावधानों को निरस्त करने के खिलाफ 'दोषपूर्ण' याचिकाएं दायर करने पर शुक्रवार को नाराजगी व्यक्त की.

भाषा
Updated: August 16, 2019, 9:13 PM IST
ARTICLE 370 को लेकर दोषपूर्ण याचिकाएं दायर होने पर SC ने नाराजगी व्यक्त की
शीर्ष अदालत ने संबंधित वकीलों से कहा कि वे आर्टिकल 370 को लेकर दायर अपनी छह याचिकाओं की खामियों को दूर करें और इसके साथ ही उसने सुनवाई स्थगित कर दी.
भाषा
Updated: August 16, 2019, 9:13 PM IST
सुप्रीम कोर्ट (SUPREME COURT) ने संविधान के आर्टिकल 370 (ARTICLE 370) के प्रावधानों को निरस्त करने के खिलाफ 'दोषपूर्ण' याचिकाएं दायर करने पर शुक्रवार को नाराजगी व्यक्त की. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi), न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे (Sharad Arvind Bobde) और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर (S. Abdul Nazeer) की पीठ ने कहा कि अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर याचिका का 'कोई मतलब' नहीं है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने याचिका पढ़ने में 30 मिनट लगाये लेकिन इससे कुछ भी समझ नहीं सके. यह भी समझ नहीं सके कि इसमें क्या अनुरोध किया गया है.

पीठ ने कहा, 'यह किस तरह की याचिका है? इसे तो खारिज किया जा सकता था लेकिन रजिस्ट्री में ऐसी ही पांच अन्य याचिकायें भी हैं जिनमें खामियां हैं. आगे पीठ ने कहा, 'आपने राष्ट्रपति को आदेश निरस्त करने का अनुरोध नहीं किया है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसमें क्या अनुरोध किया गया है.'

पीठ ने कहा, 'इस तरह के मामले में अगर यह याचिका है तो इसका कोई मतलब नहीं है.' शीर्ष अदालत मनोहर लाल शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसे केन्द्र द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने के एक दिन बाद छह अगस्त को दायर किया गया था.

खामियां दूर करने को कहा

शीर्ष अदालत ने संबंधित वकीलों से कहा कि वे आर्टिकल 370 को लेकर दायर अपनी छह याचिकाओं की खामियों को दूर करें और इसके साथ ही उसने सुनवाई स्थगित कर दी. पीठ ने इस तथ्य का भी जिक्र किया कि वह अयोध्या जैसे संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों की पीठ को तोड़ कर आर्टिकल 370 को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शकील सबीर ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर के निवासी हैं और उन्होंने आर्टिकल 370 खत्म करने के खिलाफ याचिका दायर की है. शकील ने कहा कि उन्होंने अपनी याचिका की खामियां दूर कर दी हैं लेकिन वह अभी सूचीबद्ध नहीं हुयी है. इस पर पीठ ने अपनी रजिस्ट्री से जानकारी मांगी तो पता चला कि ये खामियां बुधवार की शाम को दूर की गयी हैं.

पीठ ने कहा कि याचिका की खामियां बुधवार की शाम को दूर की गयी और बृहस्पतिवार को अवकाश था. ऐसी स्थिति में आप यह अपेक्षा कैसे करते हैं कि आपकी याचिका आज सूचीबद्ध हो जायेगी?
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई


महत्वपूर्ण मामले पर खामियों वाली याचिकाएं
पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुये वकील से सवाल किया, 'इतने महत्वपूर्ण मामले में आपने खामियों के साथ याचिका दायर क्यों की. आप दोषपूर्ण याचिका दायर करते हैं और हमारे अधिकारियों को तंग करते हैं.' पीठ ने इस अधिवक्ता से जानना चाहा कि क्या उसे जानकारी है कि जम्मू-कश्मीर के मसले पर शीर्ष अदालत में कितनी याचिकायें हैं और कितनी दोषपूर्ण हैं. पीठ ने कहा कि इस मसले पर छह याचिकायें दायर की गयी हैं.

जम्मू कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक दल नेशनल कांफ्रेन्स ने भी जम्मू कश्मीर के सांविधानिक दर्जे में किये गये बदलाव पर सवाल उठाते हुये याचिका दायर की है. इस याचिका में दावा किया गया है कि इससे नागरिकों की राय जाने बगैर ही उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया है.

यह याचिका लोकसभा में नेशनल कांफ्रेन्स के सदस्य मोहम्मद अकबर लोन और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने दायर की है. लोन जम्मू-कश्मीर विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष हैं जबकि मसूदी राज्य के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं जिन्होंने 2015 में यह व्यवस्था दी थी कि अनुच्देद 370 संविधान का स्थाई हिस्सा है. इस मसले को लेकर कुछ अन्य लोगों ने भी याचिका दायर की है लेकिन वे शुक्रवार को सूचीबद्ध नहीं थीं.
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First published: August 16, 2019, 9:03 PM IST
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