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नीतीश कटारा हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की विकास यादव की पैरोल याचिका, कहा- 25 साल की सज़ा पूरी करो

एएनआई
Updated: November 4, 2019, 12:55 PM IST
नीतीश कटारा हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की विकास यादव की पैरोल याचिका, कहा- 25 साल की सज़ा पूरी करो
विकास यादव को नीतीश कटारा के अपहरण और हत्या के मामले में 25 साल की सजा सुनाई गई थी. (फाइल फोटो)

विकास यादव (Vikas Yadav) और उसके चचेरे भाई विशाल यादव को नीतीश कटारा (Nitish Katara) के अपहरण और हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी. इस घटना को विकास की बहन भारती से कटारा के कथित प्रेम संबंधों के चलते अंजाम दिया गया था जो अलग-अलग जाति से थे.

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नई दिल्ली. साल 2002 में हुए बहुचर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड (Nitish Katara murder case) में के 25 साल जेल की सज़ा काट रहे विकास यादव (Vikas Yadav) को सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल देने से इनकार करते हुए सोमवार की उसकी याचिका खारिज कर दी.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दोषी को 25 साल कैद की सजा सुनाई गई थी और यह कोई राहत दिए बिना पूरी की जानी है. बेंच ने चार हफ्ते का पैरोल मांगने वाली याचिका को खारिज करते हुए यादव से कहा, 'आपको 25 साल कैद की सजा सुनाई गई है, इसे पूरी करो.'

इस बीच, बेंच ने यादव की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने बिना किसी राहत के 25 साल कैद की सजा सुनाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी.

बता दें कि विकास यादव और उसके चचेरे भाई विशाल यादव को कटारा के अपहरण और हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी. वर्ष 2002 में 16 और 17 फरवरी की दरम्यानी रात अपहरण के बाद कटारा की हत्या कर दी गई थी. इस घटना को विकास की बहन भारती से कटारा के कथित प्रेम संबंधों के चलते अंजाम दिया गया था जो अलग-अलग जाति से थे. इस हत्याकांड के तीसरे दोषी सुखदेव पहलवान को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. विकास यादव ने मामले में विभिन्न आधारों पर पैरोल मांगा था और कहा था कि मामले में वह पहले ही 17 साल से अधिक समय जेल में गुजार चुका है.

 



जानिए नीतीश कटारा हत्याकांड में कब क्या हुआ

16 फरवरी 2002: गाजियाबाद में एक शादी समारोह से नीतीश कटारा का अपहरण हुआ और अपहरण के बाद विकास, विशाल यादव और सुखदेव पहलवान ने नीतीश की हत्या की.

20 फरवरी: बुलंदशहर के खुर्जा गांव में नीतीश की लाश जली हुई हालत में मिली. उस दिन नीतीश कटारा की दोस्त और आरोपी की बहन इंग्लैंड चली गई.

11 मार्च 2002: करनाल से वारदात में इस्तेमाल गाड़ी बरामद.

31 मार्च 2002: यूपी पुलिस ने महज 4 पेज की चार्जशीट अदालत में पेश की.

23 अप्रैल 2002: पुलिस ने मध्यप्रदेश से विकास और विशाल यादव को गिरफ्तार किया.

23 अप्रैल 2002: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गाजियाबाद से दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर किया.

23 नवंबर 2002: अदालत ने विकास और विशाल यादव के खिलाफ आरोप तय किए.

7 अप्रैल 2003: अदालत ने यादव की बहन को गवाही के लिए समन जारी किया.

नवंबर 2005: पुलिस ने हत्याकांड के तीसरे आरोपी सुखदेव पहलवान को गिरफ्तार किया.

25 नवंबर 2006: समन जारी करने के बाद यादव की बहन गवाही के लिए नहीं पहुंचीं। अदालत ने उसे भगोड़ा करार देने की चेतावनी दी. चेतावनी के बाद वह भारत लौटी.

2 अप्रैल 2008: अदालत ने केस की सुनवाई रोजाना करना शुरू किया.

30 मई 2008: अदालत ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.

1 जुलाई 2008: नीतीश की मां ने फांसी की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की.

5 सितंबर 2008: विकास और विशाल ने निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी.

10 जुलाई 2011: निचली अदालत ने सुखदेव पहलवान को उम्रकैद की सजा सुनाई.

16 अप्रैल 2013: हाई कोर्ट ने तीनों की याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा.

2 अप्रैल 2014: हाई कोर्ट ने तीनों की याचिका खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.

03 अक्टूबर 2016- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को संशोधित किया.

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First published: November 4, 2019, 12:09 PM IST
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