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सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गुरु नानक देव की अयोध्या यात्रा का जिक्र, हिंदू आस्था का बना पुख्ता प्रमाण

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Updated: November 10, 2019, 12:49 PM IST
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गुरु नानक देव की अयोध्या यात्रा का जिक्र, हिंदू आस्था का बना पुख्ता प्रमाण
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गुरु नानक देव की अयोध्या यात्रा का जिक्र भी आया. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

शीर्ष अदालत (supreme Court) ने कहा कि रिकॉर्ड पर लाए गए जनम साखी में गुरु नानक देवजी (Guru Nanak Dev) की अयोध्या की यात्रा का वर्णन है, जहां उन्होंने भगवान राम के जन्मस्थान का दर्शन किया था.

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  • Last Updated: November 10, 2019, 12:49 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या (Ayodhya) विवाद पर ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि के दर्शन के लिए वर्ष 1510-11 में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) ने अयोध्या की यात्रा की थी. यह यात्रा हिंदुओं की आस्था और विश्वास को और दृढ़ करता है कि यह स्थल भगवान राम का जन्मस्थान है. फिलहाल गुरु नानक देव के 550वें प्रकाशवर्ष पर समारोह आयोजित किए जा रहे हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर लाए गए जनम साखी में गुरु नानक देवजी की अयोध्या की यात्रा का वर्णन है, जहां उन्होंने भगवान राम के जन्मस्थान का दर्शन किया था.

पांच में से एक जस्टिस ने इसके समर्थन रिकॉर्ड किया सबूत
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में दशकों पुराने मामले का पटाक्षेप करते हुए अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया. साथ में व्यवस्था दी कि पवित्र नगरी में मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित की जाए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा कि पांच जस्टिस में से एक ने इसके समर्थन में एक अलग से सबूत रिकॉर्ड किया कि विवादित ढांचा हिंदू भक्तों की आस्था और विश्वास के अनुसार भगवान राम का जन्मस्थान है.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दशकों पुराने इस मामले का पटाक्षेप हो गया.


1528 के पहले से जा रहे तीर्थयात्री
संविधान पीठ में शामिल एक जस्टिस ने अलग से रखे गए सबूतों में कहा कि राम जन्मभूमि की सही जगह की पहचान करने के लिए कोई सामग्री नहीं है. लेकिन, राम की जन्मभूमि के दर्शन के लिए गुरु नानक देवजी की अयोध्या यात्रा एक ऐसी घटना है, जिससे पता चलता है कि वर्ष 1528 से पहले भी तीर्थयात्री वहां जा रहे थे. शीर्ष अदालत में कहा गया था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बाबर ने सन् 1528 में करवाया था.

'गुरु नानक देव की यात्रा से हिंदुओं की आस्था को मिलती है मान्यता'
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जस्टिस ने कहा, '1510-11 में गुरु नानक देवजी की अयोध्या यात्रा और भगवान राम की जन्मभूमि का दर्शन करना हिंदुओं की आस्था और विश्वास को और दृढ़ करता है.' उन्होंने कहा कि इसलिए यह माना जा सकता है कि भगवान राम के जन्मस्थान के संबंध में हिंदुओं की जो आस्था और विश्वास वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण सहित अन्‍य धर्मग्रंथों और पवित्र धार्मिक पुस्तकों से जुड़े हैं, उन्हें आधारहीन नहीं ठहराया जा सकता. जस्टिस ने कहा, 'इस प्रकार यह पाया गया है कि वर्ष 1528 से पहले की अवधि में लिखे गए पर्याप्त ऐसे धार्मिक ग्रंथ हैं, जो राम जन्मभूमि के वर्तमान स्थल को भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में मानते हैं. इससे हिंदुओं की आस्था को मान्यता मिलती है.'

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अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने वाली संवैधानिक पीठ में सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे.


संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसला दिया
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपेंगे. पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाया जाए. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसला दिया और कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास निर्विवाद है कि संबंधित स्थल पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था और वह प्रतीकात्मक रूप से भूमि के मालिक हैं.

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First published: November 10, 2019, 12:31 PM IST
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