Sushma Swaraj Death: सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन, सिर्फ 25 साल की उम्र में बन गईं थीं मंत्री, शानदार रहा राजनीतिक सफर!

Sushma Swaraj Death News: सुषमा स्वराज के राजनीतिक करियर ने साल 1999 में फिर से टर्न लिया जब उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी से चुनावी रण में उतारा गया

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 4:39 AM IST
Sushma Swaraj Death: सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन, सिर्फ 25 साल की उम्र में बन गईं थीं मंत्री, शानदार रहा राजनीतिक सफर!
67 साल की उम्र में सुषमा स्वराज का निधन
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 4:39 AM IST
बीजेपी की सबसे प्रखर नेताओं में से एक सुषमा स्वराज (sushma swaraj) का निधन हो गया है. उनका एम्स (AIIMS) में इलाज चल रहा था. उनका 2016 में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. इस समय कई केंद्रीय मंत्री एम्स पहुंचे हुए हैं. उनका राजनीतिक करियर शानदार रहा है. ट्विटर पर लोगों की मदद के लिए मशहूर पूर्व विदेश मंत्री स्वराज के राजनीतिक करियर की शुरुआत आपातकाल के दौरान ही हो गई थी. लेकिन राजनीति में उनकी एंट्री 1977 में तब हुई जब वह हरियाणा से विधायक चुनी गईं.

1977-1979 में ही वह राज्य में चौधरी देवी लाल की सरकार में श्रम मंत्री बनाई गईं. तब उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी. यह उस समय सबसे कम उम्र में मंत्री होने का रिकॉर्ड था. उनके नाम सबसे कम उम्र में जनता पार्टी हरियाणा की अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड भी है.

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सुषमा स्वराज का जन्म अंबाला में हुआ था


साल 1990 में वह पहली बार सांसद बनीं. वह 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री थीं. इसके बाद केंद्रीय राजनीति से उनकी वापसी फिर से एक बार राज्य में हुई. साल 1998 में उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई और वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. हालांकि यह सरकार ज्यादा दिनों तक न चल सकी.

उनके राजनीतिक करियर ने साल 1999 में फिर से टर्न लिया और उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी से चुनावी रण में उतारा गया. दरअसल, बीजेपी का यह कदम विदेशी बहू सोनिया गांधी के जवाब में भारतीय बेटी को उतारने की नीति का हिस्सा था. हालांकि सुषमा यह चुनाव हार गईं. जिसके बाद साल 2000 में वह राज्यसभा सांसद चुनी गईं और अटल बिहारी सरकार में फिर से सूचना प्रसारण मंत्री बनीं.

इस दौरान न सिर्फ बीजेपी बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उनका कद काफी बढ़ गया था. यही कारण था कि साल 2009 में उन्हें बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री उम्मीदवार माना जा रहा था. हालांकि जब इन चुनावों में कांग्रेस फिर से सत्ता में आई तब स्वराज विपक्ष की नेता के तौर पर चुनी गईं. इस पद पर वह साल 2014 तक बनी रहीं. 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करने के बाद मोदी सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया. इस दौरान ट्विटर की मदद से वो लोगों की मदद करतीं रहीं.

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संस्कृत और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की थी

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अंबाला में हुआ था जन्म
इनका जन्म 14 फरवरी 1952 में अविभाजित पंजाब की अंबाला छावनी में हुआ था. परिवार मूल रूप से पाकिस्तान के लाहौर का था, जो विभाजन के बाद अंबाला आ गया. सुषमा के पिता हरदेव शर्मा कट्टर सनातनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य थे, लिहाजा घर में अक्सर राजनैतिक चर्चाएं फिजाओं में तैरा करती थीं. सुषमा ने अंबाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की.

इसी दौरान उन्हें कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ छात्रा और अपने ओजस्वी भाषण की वजह से लगातार तीन सालों तक सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार मिला. यहां से सुषमा चंडीगढ़ पहुंचीं और पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली. लॉ कॉलेज में भी सुषमा ने अपने प्रखर और स्पष्ट विचारों से जल्द ही विद्यार्थियों से लेकर प्रोफेसरों के बीच भी धाक जमा ली.

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First published: August 6, 2019, 11:35 PM IST
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