हाइवे लुटेरा साहून वॉटसएप पर चला रहा था 500 बदमाशों की कंपनी

एक या दो नहीं साहून ने 7 राज्यों की पुलिस की नाक में दम किया हुआ है.

नासिर हुसैन
Updated: November 14, 2017, 8:50 PM IST
हाइवे लुटेरा साहून वॉटसएप पर चला रहा था 500 बदमाशों की कंपनी
फाइल फोटो.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन
Updated: November 14, 2017, 8:50 PM IST
कुख्यात साहून को हाइवे का लुटेरा कहा जाता है. शायद ही कोई ऐसा ट्रक ड्राइवर होगा जो इस नाम से अच्छी तरह वाकिफ न हो. खासतौर से हाइवे पर चलने वाला ड्राइवर. जुर्म की दुनिया में साहून वो नाम है जो 500 बदमाशों से बना गिरोह चला रहा है. एक या दो नहीं साहून ने 7 राज्यों की पुलिस की नाक में दम किया हुआ है.

साहून पर दिल्ली-यूपी में दो-दो लाख और राजस्थान-हरियाणा पुलिस ने 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है. साहून 3 बार पुलिस को गच्चा देकर फरार हो चुका है. हाल ही में दिल्ली पुलिस ने साहून को गिरफ्तार किया है. लेकिन सूत्रों की मानें तो साहून खुद दिल्ली पुलिस के जाल में फंसा है.

कुछ दिन पहले ही यूपी पुलिस ने कुख्यात साहून का एनकाउंटर करने के लिए यूपी एसटीएफ की एक टीम उसके पीछे लगाई हुई थी. जिसके चलते मथुरा का रहने वाला साहून दिल्ली भाग आया था.

नीली बत्ती लगी गाड़ी से करता था लूटपाट

दिल्ली पुलिस की मानें तो कुख्यात साहून ने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं. लूट के तरीके का खुलासा करते हुए साहून ने बताया है कि वह नीली बत्ती लगी हुई गाड़ी लेकर हाइवे पर घूमता था. ट्रकों की रेकी करने के लिए वह ढाबों को अपना अड्डा बनाता था. चाय पीने और खाना खाने के बहाने साहून के गुर्गे कभी आरटीओ तो कभी सेल्स टैक्स के कर्मचारी बनकर ढाबों पर बैठे रहते थे.

जिस ट्रक में अच्छा और कीमती माल होता था उसे रास्ते में लूट लेते थे. ट्रक को चेकिंग के बहाने रोक लेते थे. ड्राइवर और क्लीनर के हाथ-पैर बांधकर खेतों में डाल देते थे. उसके बाद ट्रक सहित माल लेकर फरार हो जाते थे.

वॉटसएप से ऑपरेट करता था गिरोह

पुलिस की मानें तो साहून का एक बड़ा गिरोह है. गिरोह में करीब 500 सदस्य हैं. जिसमें से 20 शॉर्प शूटर हैं. गिरोह 7 राज्यों में फैला हुआ है. पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि साहून वॉटसएप के जरिए अपने गिरोह को आपरेट करता था.

अगर किसी ट्रक को साहून दिल्ली-एनसीआर में नहीं लूट पाता था तो उसका नम्बर और दूसरी जानकारियां हरियाणा में बैठे अपने गिरोह के दूसरे गुर्गों को दे देता था. इसी तरह से हरियाणा में ये काम नहीं हो पाने पर राजस्थान में दूसरे सदस्यों से लूट कराई जाती थी.

साहून इन सभी जानकारियों को अपने दूसरे साथियों के साथ व्हॉट्सअप पर साझा करता था. ऐसा वो पुलिस के बिछाए सर्विलांस के जाल से बचने के लिए भी करता था. पुलिस की मानें तो साहून के 32 मोबाइल नम्बर सर्विलासं पर लगे हुए हैं.

200 मुकदमों में फरार है साहून

साहून ने 2004 में अपने घर के सामने खड़ी टाटा सूमो कार को चुराकर जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा था. इसके बाद साहून ने अपराध के अंजामों की परवाह न करते हुए एक के बाद एक कई वारदातों को अंजाम दिया. आज खुद साहून को भी नहीं पता है कि उसने 13 साल में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है.

पुलिस के रजिस्टर में साहून के नाम से दर्ज एफआईआर की माने तो साहून 200 वारदात में फरार चल रहा था. साहून के नाम सबसे ज्यादा ट्रक लूट के मामले दर्ज हैं. इसके अलावा हत्या, रंगदारी और पुलिस पर हमले संबंधी केस भी दर्ज हैं.

गैंग में वारदात के हिसाब से मिलता था इलाका

साहून ने 7 राज्यों में फैले अपने गैंग को वारदात के हिसाब से इलाकों में बांट रखा था. सूत्रों की मानें तो साहून बिना किसी खून-खराबे के लूट करने वाले गुर्गों को बहुत पसंद करता था. ये ही साहून का नियम भी था. जो गुर्गा जितनी लूट करता था उसी के हिसाब से उसे अच्छा और बड़ा इलाका दिया जाता था. लेकिन यहां खास बात ये है कि दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी साहून ने अपने पास रखा हुआ था.
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