सुप्रीम कोर्ट ने की मुस्लिम महिला की याचिका खारिज, कहा- पति के तीन तलाक के 'नोटिस' पर विचार नहीं

दरअसल, महिला के पति ने तलाक देने के लिए उसे दो नोटिस दिए थे, इन नोटिस के खिलाफ महिला ने याचिका दाखिल की थी. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में रिट याचिका पर विचार नहीं कर सकता है.

News18Hindi
Updated: July 3, 2019, 11:44 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने की मुस्लिम महिला की याचिका खारिज, कहा- पति के तीन तलाक के 'नोटिस' पर विचार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर महिला की याचिका को किया खारिज
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Updated: July 3, 2019, 11:44 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मुस्लिम महिला की तीन तलाक से जुड़ी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है. दरअसल, उसके पति ने तलाक देने के लिए उसे दो नोटिस दिए थे, इन नोटिस के खिलाफ महिला ने याचिका दाखिल की थी. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में रिट याचिका पर विचार नहीं कर सकता है. न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना ने इस टिप्पणी के साथ ही मुस्लिम महिला की याचिका का निबटारा कर दिया.

न्यायालय ने उचित मंच पर जाने की दी छूट

पीठ ने कहा कि इस न्यायालय में तलाक के नोटिस को चुनौती नहीं दी जा सकती. न्यायालय ने उसे राहत के लिये उचित मंच पर जाने की छूट भी प्रदान कर दी. इस महिला की ओर से अधिवक्ता एम एम कश्यप ने कहा कि पर्सनल लॉ के तहत तलाक-ए-अहसन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है.

कोर्ट ने कहा कि वह याचिका की गुण दोष का निर्णय नहीं कर सकती है.


याचिका के गुण-दोष में नहीं जा सकती कोर्ट

पीठ ने कहा कि वह याचिका के गुण-दोष में नहीं जा सकती है और याचिकाकर्ता को उचित मंच पर जाना चाहिए. दिल्ली निवासी इस महिला का दावा है कि वह इस व्यक्ति के साथ उसका 22 फरवरी, 2009 को मुस्लिम रीतियों से विवाह हुआ था और इस समय उसके 9 और छह साल के दो बच्चे हैं.

महिला ने इस तरह की नोटिस देने के लिए पति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का भी अनुरोध किया था. पति ने पहला नोटिस 25 मार्च को और दूसरा नोटिस 7 मई को दिया है.
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First published: July 3, 2019, 11:01 PM IST
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