जक़ात से 26 मुस्लिम युवा बने आईएएस और आईपीएस अफसर

आपको जानकर हैरानी होगी कि जक़ात फाउंडेशन जक़ात (दान) के पैसों से चलता है.

नासिर हुसैन
Updated: April 28, 2018, 10:37 AM IST
जक़ात से 26 मुस्लिम युवा बने आईएएस और आईपीएस अफसर
आपको जानकर हैरानी होगी कि जक़ात फाउंडेशन जक़ात (दान) के पैसों से चलता है.
नासिर हुसैन
Updated: April 28, 2018, 10:37 AM IST
जहां चाहा हो तो राह अपने आप बन ही जाती है. ऐसा ही कुछ साबित किया है जक़ात फाउंडेशन ऑफ इण्डिया ने. शुक्रवार को आए यूपीएससी के फाइनल रिजल्ट में 26 उन मुस्लिम युवाओं के नाम शामिल हुए हैं जिन्होंने जक़ात फाउंडेशन की मदद से कोचिंग कर यूपीएससी की तैयारी की थी. पिछले साल की तुलना में इस बार 10 बच्चे ज्यादा चुने गए हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि जक़ात फाउंडेशन जक़ात (दान) के पैसों से चलता है.

इस साल जक़ात की मदद से आईएएस और आईपीएस बनने वाले युवाओं में सबसे अधिक यूपी और केरल से 9-9 युवा हैं. जबकि जम्मू-कश्मीर से तीन और महाराष्ट्र-बिहार से 2-2 युवा हैं. पिछले साल के मुकाबले इस बार लड़कियों की संख्या कम है. पिछले साल जहां 4 लड़कियों ने जक़ात की मदद से ये परीक्षा पास की थी तो इस बार ये संख्या सिर्फ 2 है. लेकिन सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारियों के लिए जक़ात फाउंडेशन की मदद पाना आसान नहीं है.

जक़ात की मदद पाने के लिए पहले सिविल सर्विस प्री परीक्षा स्तर की परीक्षा पास करनी होती है. उसके बाद इंटरव्यू भी पास करना होता है. इस परीक्षा का आयोजन जक़ात फाउंडेशन ही करता है. तो जक़ात फाउंडेशन की मदद पाने का क्या है तरीका और कैसे तैयारी कराती है युवाओं को. आइए जानते हैं खुद जक़ात फाउंडेशन के अध्यक्ष डाक्टर सैय्यद जफर महमूद से. जो खुद भी सिविल सर्विस से रिटायर्ड हैं.

ऑल इण्डिया लेवल पर होती है परीक्षा और इंटरव्यू

जफर महमूद बताते हैं कि आमतौर पर अप्रैल के आखिरी रविवार को हम राष्ट्रीय स्तर पर लिखित परीक्षा कराते हैं. ये परीक्षा दिल्ली में होती है. तीन सेंटर श्रीनगर, मल्लापुरम (केरल) और कोलकाता में हम खुद जाकर परीक्षा लेते हैं.

लिखित परीक्षा का पेपर सिविल सर्विस की प्री परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के स्तर का होता है. परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों का सिविल सर्विस के रिटायर्ड और सर्विस कर रहे अधिकारियों का पैनल इंटरव्यू लेता है. लिखित परीक्षा के लिए नवंबर में आन लाइन आवेदन लिए जाते हैं.

लड़कियों के लिए सीट की नहीं है कोई सीमा

डॉ. जफर का कहना है कि एक बैच के लिए हम 50 लड़कों का चुनाव करते हैं. लेकिन लड़कियों के लिए सीट की कोई सीमा नहीं है. लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बाद चाहें जितनी लड़कियां कोचिंग के लिए आ सकती हैं. हालांकि अभी तक एक बैच में 10 से 12 लड़कियां आती हैं, जिसमें से तीन से पांच लड़कियां कामयाब हो रही हैं.

परीक्षा पास करने वाले युवाओं की लिस्ट.


जक़ात फाउंडेशन इस तरह कराती है परीक्षा की तैयारी

डॉ. जफर का कहना है कि दिल्ली में हमारे पास चार हॉस्टल हैं. सबसे पहले हम चुने गए लड़के-लड़कियों को दिल्ली की कुछ अलग-अलग कोचिंग में दाखिला दिलाते हैं. इसका खर्च जक़ात फाउंडेशन ही उठाती है. कोचिंग में पढ़ाई करने के बाद शुरू होती है जक़ात फाउंडेशन की पढ़ाई.

- हॉस्टल में लाइब्रेरी और रीढिंग रूम बनाए गए हैं.

- ग्रुप डिस्कशन के लिए एक हॉल बनाया गया है.

- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पैनल के साथ चर्चा कराई जाती है.

- जीएसटी पर चर्चा कराने के लिए रेवेन्यू सर्विस के रिटायर्ड और सर्विंग अधिकारियों को बुलाया गया था.

- देश के अलग-अलग हिस्सों से जमा कर समय-समय पर स्टाडी मेटेरियल दिया जाता है.

- व्हाट्सअप ग्रुप पर देश और विदेश में हर रोज घटने वाली घटनाओं की जानकारी दी जाती है.

- प्री और मुख्य परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू की तैयारी कराई जाती है.

- जक़ात फाउंडेशन का पैनल एक उम्मीदवार का तीन बार इंटरव्यू लेते हैं.

- पैनल में सिविल सर्विस के रिटायर्ड और सर्विंग अधिकारी शामिल हैं.

- सिविल सर्विस की तरह से फुल ड्रेस में इंटरव्यू की रिहर्सल कराई जाती है.

- अधिकारियों का पैनल एक दिन में पांच उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेता है.

- ये ही पैनल उसके बाद उम्मीदवारों को उनकी खामियां बताते हुए सुधार के लिए टिप्स देते हैं.

नोट: डॉ. जफर बताते हैं कि हॉस्टल में उम्मीदवार सिर्फ पढ़ते हैं, खाना खाते हैं और नमाज पढ़ते हैं.

जक़ात फाउंडेशन इस तरह जुटाती है आर्थिक मदद

जक़ात फाउंडेशन एक एनजीओ है. ये पूरी तरह से दूसरे लोगों द्वारा की गई मदद से ही चलती है. मदद के रूप में जक़ात फाउंडेशन को नाम के अनुसार जक़ात, सदका, इमदाद और चैरेटी के रूप में पैसा मिलता है. इसी का इस्तेमाल जक़ात फाउंडेशन सर सैय्यद कोचिंग एण्ड गाइडेंस सेंटर फॉर सिविल सर्विस को चलाने में करती है.

कैसे पड़ी जक़ात फाउंडेशन की नींव

डॉ. जफर का कहना है कि वो जब एएमयू में पढ़ते थे वो खुद और उनके कई दोस्त सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते थे. लेकिन मदद करने वाला कोई कोचिंग सेंटर नहीं था. दूसरा ये कि मैं खुद भी सच्चर कमेटी में रहा था. रिपोर्ट में जो हाल मैंने देखा तो उसके बाद लगा कि वाकई सिविल सर्विस की तैयारी कराने के लिए इस तरह का कोई सेंटर होना जरूर चाहिए.
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