लाइव टीवी
Elec-widget

सांभर झील में इस बैक्टीरिया की वजह से मर रहे हैं हजारों पक्षी: बर्ड एंड एनिमल एक्सपर्ट

News18Hindi
Updated: November 20, 2019, 6:13 PM IST
सांभर झील में इस बैक्टीरिया की वजह से मर रहे हैं हजारों पक्षी: बर्ड एंड एनिमल एक्सपर्ट
इस मौसम में दूर दराज के इलाके से प्रवासी पक्षियों के आने के कारण ज्यादा पक्षियों की मौत होती है.

पक्षी और जीव विशेषज्ञ (Bird And Animal Expert) एन शिव कुमार ने बताया कि सांभर झील (Sambhar lake) में अभी तक करीब 20 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है. माना जा रहा है कि इनकी मौत बोटुलिनम बैक्टीरिया (botulism bacteria) से फ़ैलने वाली बीमारी क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (एक प्रकार के जहर) के कारण हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 20, 2019, 6:13 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. राजस्थान की सांभर झील (Sambhar lake) में बीते कुछ दिनों में ही करीब 20 हजार से अधिक पक्षी मर चुके हैं. हजारों की संख्या में पक्षियों की मौत से राजस्थान (Rajasthan) सरकार भी परेशान है. यूपी (UP) के दो अलग-अलग जिलों से गई डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की टीम झील के पानी और पक्षियों की जांच कर रही है. वहीं जाने-माने पक्षी और जीव विशेषज्ञ (Bird And Animal Expert) एन शिव कुमार का कहना है कि सांभर झील की गंदगी में पनपने वाले एक बैक्टीरिया के चलते पक्षियों की मौत हो रही है. जानते हैं एन शिव कुमार की बताई उन वजहों को जो पक्षियों की मौत का कारण बन रही हैं.

सांभर झील में बोटुलिनम ले रहा है पक्षियों की जान
पक्षी और जीव विशेषज्ञ एन शिव कुमार ने बताया कि सांभर झील में अभी तक करीब 20 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है. माना जा रहा है कि इनकी मौत बोटुलिनम बैक्टीरिया से फ़ैलने वाली बीमारी बोतुलिज्म (एक प्रकार के जहर) के कारण हुई. बोटुलिनम अशक्त करने वाली एक बीमारी है, जो क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नामक बैक्टीरिया से फैलता है. वैसे तो कोई भी पक्षी इस बीमारी का शिकार हो सकता है, लेकिन बत्तख, कलहंस, हंस, सारस, बगुला इसके ज्यादा शिकार होते हैं. अधिकतर झीलों, तालाबों व स्थिर पानी वाले जलाशयों में रहने वाले पक्षियों को इस बैक्टीरिया से ज्यादा खतरा होता है.

पानी में ऐसे पैदा होता है बोतुलीनुम बैक्टीरिया

एन शिव कुमार बताते हैं कि वैसे तो पानी में पड़ी वस्तुओं के सड़ने से यह क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया पैदा होता है. लेकिन कुछ मात्रा में बोटुलिनम बैक्टीरिया पानी में हमेशा मौजूद रहता है. लेकिन जब पानी ज्यादा गंदा हो जाता है तो इनकी संख्या बढ़ जाती है. तब पानी में रहने वाले पक्षियों को ये प्रभावित करने लगता है.

सांभर झील का फोटो (Photo by A.K Harinarain)


पक्षियों पर ऐसे अटैक करता है बोतुलीनुम बैक्टीरिया
Loading...

पक्षी और जीव विशेषज्ञ का कहना है कि बोटुलिनम बैक्टीरिया एक तरह का विषैला पदार्थ पैदा करता है. और पानी के रास्ते जब ये पदार्थ पक्षियों के शरीर में फ़ैलता है तो उससे पक्षियों की मौत हो जाती है. बोटुलिनम का इलाज प्रवासी या एक स्थान पर नहीं टिकने वाले पक्षियों में मुश्किल होता है. बोटुलिनम ऐसी नदियों में नहीं होता, जिसका पानी हमेशा बहता रहता है और पानी हमेशा ही ताजा होता है और रुकता नहीं है. राजहंस (flamingos) और हवासील (pelican) जैसे बड़े पक्षियों पर बोटुलिनम का असर नहीं होता और अगर करता भी है तो बहुत देर से.

पक्षी के मरने पर तुरंत करना होता है ये काम
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इस मौसम में दूर दराज के इलाके से प्रवासी पक्षियों के आने के कारण ज्यादा पक्षियों की मौत होती है. लेकिन यह जरूरी है कि जो पक्षी मर जाते हैं उन्हें जल्दी जमीन में गाड़ दिया जाए या उन्हें जला दिए जाए. जिससे की गंदे पानी में इस बैक्टीरिया को और फ़ैलने से रोका जा सके.

शॉपलर डक एक प्रवासी पक्षी है.


सांभर झील और मरे पक्षियों के बारे में कुछ और तथ्य
पक्षी विशेषज्ञ एन शिव कुमार बताते हैं कि अभी तक किसी भी मृत पक्षी में बर्ड फ़्लू का पता नहीं चला है. बोटुलिनम के कारण अभी तक पक्षियों की 30 प्रजातियां प्रभावित हुईं और मरी हैं. पक्षियों के मरने की खबर राजस्थान के जयपुर, नागौर और अजमेर जिलों से है. सांभर झील भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है. यह झील जयपुर से 100 किलोमीटर पश्चिम में है और इसका क्षेत्र कई जिलों में फैला है. झील में सैकड़ों की संख्या में नलकूप लगाए गए हैं ताकि जमीन के अन्दर से खारा पानी निकाला जा सके. इनमें से कई नल पानी के अंदर दबे हुए हैं और हो सकता है कि बिजली का करंट लगने से भी पक्षियों की मौत हुई हो. अंग्रेजों के समय से ही सांभर झील का प्रयोग देश में नमक बनाने के लिए होता आया है. गर्मी के दिनों में इसका पानी बहुत ही खारा हो जाता है. वर्ष के अधिकांश समय में पानी के अभाव में यह झील सूखी रहती है.

सांभर झील में पाए जाने वाले पक्षियों की प्रजातियां
स्पॉट-बिल्ड (दागदार चोंच) डक, शोवेल (चौड़ी चोंच), पिनटेल (नुकीली पूंछ), पर्पल स्वैम्पहेन, मूरहेन (खादर कुक्कुट), टिकरी, ग्रेबी (वंजुल), कोर्मोरेंट (जलकौवा), इग्रेट (बगुला), ग्रे हेरॉन (धूसर बगुला), पर्पल हेरॉन (बैंगनी बगुला), लार्ज इग्रेट (बड़ा बगुला), कैटल इग्रेट (गाय बगुला), इंडियन पोंड हेरॉन (भारतीय तालाबी बगुला), आदि.

ये भी पढ़ें :

पुलिस ने चेकिंग के लिए बाइक रोकी तो युवक बोला, ‘मेरा भाई वकील है, जिन्होंने अभी तुम्हें पीटा था’

इस मुस्लिम सांसद ने NRC के मुद्दे पर सरकार के बारे में कही ये बड़ी बात

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Delhi से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 20, 2019, 4:25 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...