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तीस हजारी कोर्ट झड़प मामले की जांच करेंगे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज, अन्य एजेंसियां करेंगी सहयोग

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Updated: November 3, 2019, 7:04 PM IST
तीस हजारी कोर्ट झड़प मामले की जांच करेंगे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज, अन्य एजेंसियां करेंगी सहयोग
तीस हजारी कोर्ट में पुलिस-वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प में हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं.

तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) झड़प मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 2 ASI को निलंबित किया, साथ ही जांच चलने तक एडिशनल DCP हरविंदर सिंह और स्पेशल सीपी सिंह संजय के ट्रांसफर का भी आदेश दिया है.

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  • Last Updated: November 3, 2019, 7:04 PM IST
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दिल्ली. तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) में पुलिस-वकीलों (Police-Lawyers) के बीच हुई हिंसक (Scuffle) झड़प में हाई कोर्ट (High Court) ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसपी गर्ग की अध्यक्षता में यह जांच होगी. 6 सप्ताह में जांच पूरी करनी होगी. सीबीआई डायरेक्टर और अन्य एजेंसियों के डायरेक्टर जस्टिस एसपी गर्ग की मदद करेंगे.

बता दें कि रविवार को इस मामले की दूसरी बार सुनवाई हुई. रविवार को हुई पहली सुनवाई में हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली से जवाब मांगा था. साथ ही दोनों पक्षों से सुलह करने को भी कहा था, लेकिन दूसरी सुनावाई में बार काउंसिल न्यायिक जांच पर अड़ी रही. इसके बाद हाईकोर्ट ने यह फैसला लिया.

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम कर रही है. एक SI को सस्‍पेंड किया गया है, जबकि एक पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया गया है. वहीं वकीलों की तरफ से बार काउंसिल ने कहा कि वो चाहते हैं कि मामले की न्यायिक जांच हो और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज इसकी जांच करें.

दमकल विभाग के मुताबिक तीस हजारी कोर्ट में कॉल मिलने पर 4 गाड़ियां मौके पर भेजी गई हैं.

कोर्ट ने पूछा- जिन वकीलों को चोट आई हैं, जो घायल हैं उनकी तरफ से कोई एफआईआर हुई है? इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि घायल वकीलों का अभी बयान लिया जा रहा है. अभी और वकीलों का लेना बाकी है. अभी तक घायल वकीलों की तरफ से कोई एफआईआर दर्ज नहीं है. इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि मामले की न्यायिक जांच हो, साथ ही समय सीमा भी निर्धारित की जाए. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आरोपी पुलिसवालों का नाम भी कोर्ट में बताए.

बार काउंसिल की तरफ से वकील मोहित माथुर ने कहा कि वीडियो में भी देखा जा सकता है कि एक वकील को 6 पुलिसवाले पीट रहे हैं. बार काउंसिल ने कहा कि पुलिस को कोर्ट परिसर में फुल्ली लोडेड वेपन ले जाने की इजाजत नहीं है. इसके बावजूद पुलिस लेकर गई. दिल्ली पुलिस ने नियमों को ताक पर रखा. इस पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कहा कि स्पेशल सीपी विजिलेंस भी इस मामले की इंटरनल जांच कर रहे हैं.

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस और बार काउंसिल आमने-सामने हो गए हैं.
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'जिसने गोली चलाने और लाठीचार्ज का आदेश दिया उसकी गिरफ्तारी हो'
बार काउंसिल के वकील मोहित माथुर ने कोर्ट से कहा कि पुलिस द्वारा वकीलों पर की गई एफआईआर पर कोई एक्शन नहीं होना चाहिए, जब तक कोर्ट आदेश न दे. दिल्ली पुलिस ने कहा कि एक एएसआई को सस्पेंड किया गया है और एक का ट्रांसफर किया गया है. इस बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि जिस अधिकारी ने गोली चलाने और लाठी चार्ज करने का आदेश दिया है, उसे तुरंत ही गिरफ्तार करना चाहिए.

'ये न्यायिक व्यवस्था की बेइज्जती का मामला है'
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कोर्ट में कहा कि हमें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है. ये न्यायिक व्यवस्था की बेइज्जती का मामला है. लिहाजा सुप्रीम कोर्ट या फिर हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज इस मामले की जांच करें. आरोपी पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उन्हें वकीलों के चैम्बर और जो भी नुकसान हुआ उसकी भरपाई करने को कहा जाए. कोर्ट को इसके साथ ही एक गाइडलाइन बनानी चाहिए, जिससे दोबारा इस तरह की घटना न हो.

'हाईकोर्ट के आदेश से हम खुश हैं'
बार काउंसलिंग ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि कल पुलिस से बर्बबता की जो घटना हुई, गोली चली, लाठीचार्ज किया गया, उसमें एक वकील मरते मरते बचा है. पुलिस ने वकीलों के खिलाफ फर्जी FIR भी दर्ज कर दी है. आज हाईकोर्ट के आदेश से हम खुश हैं. हाईकोर्ट ने हमारी सभी मांगें मान ली हैं. कोर्ट ने हमारी न्यायिक जांच की भी बात मान ली.

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First published: November 3, 2019, 4:38 PM IST
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