न्यायाधिकरण ने सिमी पर 5 साल की पाबंदी को सही ठहराया

भाषा
Updated: August 29, 2019, 10:53 PM IST
न्यायाधिकरण ने सिमी पर 5 साल की पाबंदी को सही ठहराया
न्यायाधिकरण ने सिमी पर पाबंदी को सही ठहराया.

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के एक न्यायाधीश की अगुवाई वाले एक न्यायाधिकरण (Tribunal) ने केंद्र सरकार द्वारा अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर लगायी गयी पाबंदी को 5 साल के लिए बढ़ाये जाने को सही ठहराया है.

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दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के एक न्यायाधीश की अगुवाई वाले एक न्यायाधिकरण (Tribunal) ने केंद्र सरकार द्वारा अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर लगायी गयी पाबंदी को 5 साल के लिए बढ़ाये जाने को सही ठहराया है. न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की अगुवाई वाला न्यायाधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सिमी को ‘अवैध संगठन’ घोषित करने के लिए ‘पर्याप्त सामग्री’ है.

न्यायाधिकरण ने कहा, “उसके सामने रखे गए सबूतों का विश्लेषण करने के बाद अधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस बात के लिए पर्याप्त सामग्री है कि वर्तमान मामले में यूएपीए की धारा 2(p) (i) और (ii) की शर्तें पूरी होती हैं. उपरोक्त निष्कर्ष के आलोक में सिमी को अवैध संगठन घोषित करने के पर्याप्त कारण हैं और यूएपीए की धारा 4(3) के तहत आदेश जारी किया जाता है और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम, 1967 की धारा 3(1) के तहत 31 जनवरी, 2019 को गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना एस. ओ. 564 (ई) के तहत की गई घोषणा की पुष्टि की जाती है.’’

स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर पाबंदी के बाद जनवरी में इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया था. सिमी के सदस्य जिन आतंकी कृत्यों में कथित रूप से शामिल थे वे 2017 में गया में हुए धमाके, 2014 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए विस्फोट और 2014 में भोपाल की जेल से भागने की घटनाएं प्रमुख हैं.

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First published: August 29, 2019, 10:52 PM IST
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