रिजल्‍ट को लेकर बच्चों पर न बनाएं दबाव क्योंकि जिंदगी नंबरों से बड़ी है!

रिजल्‍ट जो भी हो, लेकिन बच्‍चों पर दवाब न बनाएं. बल्कि समझाएं कि आप उनके किसी भी बुरे वक्‍त में साथ हैं.

News18Hindi
Updated: April 17, 2019, 5:44 PM IST
रिजल्‍ट को लेकर बच्चों पर न बनाएं दबाव क्योंकि जिंदगी नंबरों से बड़ी है!
तनाव में छात्र
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Updated: April 17, 2019, 5:44 PM IST
यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्‍ट जारी होने जा रहा है. ऐसे में पढ़ाई की इस सीढ़ी काे पार करते वक्‍त यह देखना बेहद जरूरी है कि बच्‍चा कहीं रिजल्‍ट को लेकर टेंशन में तो नहीं है. अगर उसके कम मार्क्‍स आए हैं तो वह डिप्रेशन में तो नहीं जा रहा. कहीं अभिभावक खुद भी तो बच्‍चे के ऊपर दवाब नहीं बना रहे. ध्यान रखिए, जिंदगी नंबरों से बहुत बड़ी है.

रिजल्‍ट के बाद और कभी-कभी पहले भी बच्‍चे चिंता का शिकार हो जाते हैं. वे अपने मन की बात किसी से नहीं कह पाते और इसी उधेड़बुन में गलत कदम भी उठा लेते हैं. लेकिन बच्‍चों पर अभिभावक की एक नजर उन्‍हें इन सब दुविधाओं से बचा सकती है.


यूपी बोर्ड रिजल्ट 2019

UP Board Results 2019

मनोवैज्ञानिक और काउंसिलर अब्‍दुल माबूद कहते हैं कि रिजल्‍ट का काउंटडाउन शुरू होते ही बच्‍चे एक अजीब बेचैनी से घिर जाते हैं. यह काफी नाजुक दौर होता है. ऐसे में कैसा परीक्षा परिणाम आएगा या खराब परिणाम आना, दोनों ही स्थितियों में बच्‍चे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं और गलत दिशा में चलने लगते हैं.

ऐसे में बच्‍चों को उनकी जिंदगी की कीमत समझाना अभिभावकों का पहला काम होना चाहिए. माबूद कहते हैं कि रिजल्‍ट को लेकर अभिभावकों को भी नर्म रहना होगा. अभिभावकों को कोशिश करनी चाहिए कि बच्‍चे को सामान्‍य रखने की कोशिश करें.

हालांकि कई बार ऐसा होता है कि अभिभावक बच्‍चों की टेंशन को पहचान नहीं पाते. ऐसे में माबूद बता रहे हैं कुछ लक्षण और कुछ टिप्‍स जिनसे अभिभावक आसानी से अपने बच्‍चों के बारे में पता लगा सकते हैं साथ ही सतर्क रहकर किसी भी अनहोनी से बच सकते हैं.

इन लक्षणों से पता करें, कहीं छात्र परेशान तो नहींः
छात्र चुपचाप और गुमसुम रहे.
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एकांत में रहे, किसी से मिले-जुले नहीं.
बात-बात पर झुंझलाए और चिल्‍लाए.
ठीक से खाना न खाए. या खाना छोड़ दे.
जीवन के संबंध में निराशावादी बातें करने लगे.
रिजल्‍ट की बात आते ही गुस्‍सा होने लगे.

क्‍या करें अभिभावक
.रिजल्‍ट जो भी हो, लेकिन बच्‍चों पर रिजल्‍ट को लेकर दवाब न बनाएं. बल्कि समझाएं कि आप उनके किसी भी बुरे वक्‍त में साथ हैं.
.कभी भी रिजल्‍ट को प्रतिष्‍ठा से न जोड़ें.
.रिजल्‍ट जैसा भी हो उसे स्‍वीकार करें और बच्‍चे को भी कहें कि वह आगे और मेहनत करे.
.अगर छात्र की कोई गतिविधि अजीब लग रही है तो तत्‍काल ध्‍यान दें और काउंसिलर से संपर्क करें..
.रिजल्‍ट खराब आने पर खुद ही दुलारकर बच्‍चे की काउंसिलिंग करें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें.
.असफल लोगों ने नई मंजिलें गढ़ी हैं, बच्‍चों को उनकी छुपी हुई क्षमता का अहसास कराएं.
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