तीसरी कक्षा पास पद्मश्री हलधर नाग की कोसली कविताएं बनी पीएचडी का विषय

नाग बिना किसी किताब का सहारा लिए, अपनी कविताएं सुनाने के लिए जाने जाते हैं. उनकी कवितायें सामाजिक मुद्दों के बारे में बात करती है, उत्पीड़न, प्रकृति, धर्म, पौराणिक कथाओं से लड़ती है, जो उनके आस-पास के रोजमर्रा के जीवन से ली गई हैं.

News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 10:07 AM IST
तीसरी कक्षा पास पद्मश्री हलधर नाग की कोसली कविताएं बनी पीएचडी का विषय
तीसरी कक्षा पास पद्मश्री हलधर नाग की कोसली कविताएं बनी पीएचडी का विषय
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Updated: April 27, 2019, 10:07 AM IST
कोसली भाषा के कवि पद्मश्री हलधर नाग की सामान्य शिक्षा केवल तीसरी कक्षा तक ही हुई है, लेकिन उनकी कविताओं पर अब तक पांच स्कोलरो ने पीएचडी किया है. इसके अलावा, संभलपुर विश्वविद्यालय इनके सभी लेखन कार्य को हलधर ग्रंथाबली-2 नामक एक पुस्तक के रूप में अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर चुकी है. नाग बिना किसी किताब का सहारा लिए, अपनी कविताएं सुनाने के लिए जाने जाते हैं. नाग के एक करीबी सहयोगी के अनुसार, वह रोजाना कम से कम तीन से चार कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जहां वह कविता पाठ करते हैं.

69 साल के हलधर नाग का जन्म 1950 में संभलपुर से लगभग 76 किलोमीटर दूर, बरगढ़ जिले में एक गरीब परिवार में हुआ था. जब वह 10 साल के थे, तब उनके पिता की मृत्यु हो गई, और वह तीसरी कक्षा के बाद पढ़ नहीं सके. इसके बाद वे एक मिठाई की दुकान पर बर्तन धोने का काम करने लग गए. दो साल बाद, उन्हें एक स्कूल में खाना बनाने का काम मिल गया, जहां उन्होंने 16 साल तक नौकरी की.


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स्कूल में काम करते हुए, उन्होंने महसूस किया कि उनके गांव में बहुत सारे स्कूल खुल रहे हैं. नाग ने एक बार प्रत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था कि मैंने एक बैंक से संपर्क किया और स्कूली छात्रों के लिए स्टेशनरी और खाने-पीने की एक छोटी सी दुकान शुरू करने के लिए 1000 रुपये का ऋण लिया.

अब तक कोसली में लोक कथाएं लिखने वाले नाग ने 1990 में अपनी पहली कविता लिखी. जब उनकी कविता ‘ढोडो बरगाछ’ (पुराना बरगद का पेड़) एक स्थानीय पत्रिका में प्रकाशित हुई, तो उन्होंने चार और कवितायेँ भेज दी और वो सभी प्रकाशित हो गए. इसके बाद उन्होंने दुबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा. उनकी कविता को आलोचकों और प्रशंसकों से सराहना मिलने लगी. उनकी कवितायें सामाजिक मुद्दों के बारे में बात करती है, उत्पीड़न, प्रकृति, धर्म, पौराणिक कथाओं से लड़ती है, जो उनके आस-पास के रोजमर्रा के जीवन से ली गई हैं.

हलधर नाग बताते है मेरे विचार में, कविताओं में वास्तविक जीवन से मेल और लोगों के लिए एक संदेश होना चाहिए. हमेशा एक सफेद धोती और नंगे पैर चलने वाले नाग को, उड़िया साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2016 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. उन्होंने बताया कि मुझे सम्मानित किया गया और इसने मुझे और लिखने के लिए प्रोत्साहित किया. मैंने अपनी कविताओं को सुनाने के लिए आस-पास के गांवों का दौरा करना शुरू कर दिया और मुझे सभी लोगों से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली. यहीं से उन्हें ‘लोक कवि रत्न’ नाम से जाना जाने लगा.

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First published: April 27, 2019, 9:05 AM IST
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