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कैसा रहा है यूपी के सीएम ‘योगी’ आदित्यनाथ का दलितों से रिश्ता!

कैसा रहा है यूपी के सीएम ‘योगी’ आदित्यनाथ का दलितों से रिश्ता!

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ

योगी का दलित प्रेम दिल से है या सिर्फ दिखावा? नाथ परंपरा के तहत योगी और उनका मठ लंबे समय से छुआछूत के खिलाफ काम कर रहे हैं. सीएम बनने के बाद दलित के घर खाना खा रहे हैं तो इसमें हर्ज क्या है!

    'अस्पृश्यता हिंदू समाज का अभिशाप है. धर्मशास्त्रों में इसके लिए कोई स्थान नहीं'

    ये लाइनें किसी दलित नेता की नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के उस मठ की दी हुई हैं जिसके वो पीठाधीश्वर भी हैं. उनकी कट्टर छवि तले यह बात छिप जाती है. गोरखनाथ मंदिर उन मंदिरों की विचारधारा से अलग है जिनमें दलितों का प्रवेश वर्जित होता है. इस मंदिर की ओर से जात-पात के खिलाफ लंबे समय से अभियान चलाया जा रहा है.

    ग्राम स्वराज अभियान के तहत योगी आदित्यनाथ प्रतापगढ़ में दलित के घर भोजन किया. अब वह मुरादाबाद में एक दलित ग्राम प्रधान के घर खाना खाने वाले हैं. अपने आपको दलितों की सबसे बड़ी खैरख्वाह बताने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस पर सवाल उठाए हैं. मायावती ने कहा "योगी आदित्यनाथ का दलित के घर खाना खाना दिखावा है. दलित अब ज्यादा दिन बेफकूफ बनने वाले नहीं हैं, बीजेपी की सच्चाई अब सामने आ चुकी है...."

    हो सकता है कि योगी का ये दांव दलितों का वोट लेने के लिए हो. 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए हो. संभव है कि इस कदम का कोई राजनीतिशास्त्र हो. लेकिन सवाल उठता है कि क्या योगी आदित्यनाथ पहली बार किसी दलित के घर भोजन कर रहे हैं?

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    दरअसल, योगी पहले भी समाज में समरसता के लिए दलितों के बीच जाकर पहले भी भोजन करते रहे हैं, ताकि हिंदू विभाजित न हो. मायावती के जवाब के लिए उस मठ की विचारधारा पर गौर करते हैं, जिसके योगी आदित्यनाथ प्रमुख हैं. योगी की वजह से पूर्वांचल का गोरखनाथ मंदिर इन दिनों सत्ता का केंद्र है.

    मंदिर का मत है कि "हरिजन भी हिंदू समाज के उसी उसी तरह से अभिन्न अंग हैं जिस तरह क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, जैन, बौद्द, सिख, आर्यसमाजी अथवा सनातनी लोग हैं. उनके प्रति समाज में उत्पन्न भेदभाव की भावना चाहे वह धार्मिक हो या सामाजिक, राजनैतिक हो अथवा आर्थिक, समाप्त कर दी जानी चाहिए. शास्त्रों में इसके लिए कोई स्थान नहीं है. भूतकाल में इसकी वजह से काफी क्षति उठानी पड़ी है. अब हम इसे भविष्य में कदापि चालू रहने की आज्ञा नहीं दे सकते. यह हिंदू समाज के लिए आत्महत्या समान ही है."

    योगी को बहुत नजदीक से जानने वाले गोरखपुर के वरिष्ठ पत्रकार टीपी शाही कहते हैं "गोरखनाथ पीठ की परंपरा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक जनजागरण का अभियान चलाया. सहभोज के माध्यम से छुआछूत (अस्पृश्यता) पर प्रहार किया. इसलिए उनके साथ बड़ी संख्‍या में दलित भी जुड़े हुए हैं. गांव-गांव में सहभोज के माध्यम से ‘एक साथ बैठें-एक साथ खाएं’ मंत्र का उन्होंने उद्घोष किया."

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    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2016 में देश भर में दलित उत्पीड़न के 40,801 मामले दर्ज हुए. जिनमें से लगभग एक चौथाई 10,426 अकेले यूपी से हैं. योगी ने मार्च 2017 में यूपी की सत्ता संभाली. ये आंकड़े अखिलेश यादव के शासनकाल के हैं. फिर भी दलित नेता भगवा ब्रिगेड से आने वाले मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को दलितों का विरोधी बताते हैं.

    शाही बताते हैं, "गोरखनाथ मठ के मुख्य पुजारी कमलनाथ दलित चेहरा हैं. योगी के बाद सारा कामकाज वही संभालते हैं. आदित्‍यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने दक्षिण भारत के मंदिरों में दलितों के प्रवेश को लेकर संघर्ष किया. जून 1993 में पटना के महावीर मंदिर में उन्‍होंने दलित संत सूर्यवंशी दास का अभिषेक कर पुजारी नियुक्‍त किया."

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    "इस पर विवाद भी हुआ लेकिन वे अड़े रहे. यही नहीं इसके बाद बनारस के डोम राजा ने उन्‍हें अपने घर खाने का चैलेंज दिया तो उन्‍होंने उनके घर पर जाकर संतों के साथ खाना खाया. इसीलिए योगी आदित्‍यनाथ का भी दलितों के प्रति लगाव रहा है और वे उनके लिए काम करते रहे हैं."

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    Tags: BJP, BSP, Mayawati, Yogi adityanath

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