Gorakhpur by election result 2018: पहली बार जातीय जाल में फंसा गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव!

सपा ने गोरखपुर में निषाद प्रत्याशी उतारा तो बीजेपी को मछुआरा सम्मेलन करवाना पड़ा था

News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 1:18 PM IST
Gorakhpur by election result 2018: पहली बार जातीय जाल में फंसा गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव!
गोरखपुर का चुनाव परिणाम बड़ा सियासी संदेश देंगे
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Updated: March 14, 2018, 1:18 PM IST
गोरखपुर में जब तक योगी आदित्यनाथ खुद चुनाव लड़ते थे तब तक किसी भी तरह के जातीय समीकरण ने काम नहीं किया. पिछले तीन चुनावों से वह 50 फीसदी से ज्यादा वोट अकेले लेते रहे हैं. लेकिन इस बार न तो वह खुद चुनाव लड़ रहे थे और न ही मंदिर से जुड़ा कोई व्यक्ति. ऊपर से सपा और बसपा एक साथ आ गए. इसलिए चुनाव दोनों तरफ से जातीय जाल में फंसा नजर आया. अब तक आए रुझानों को देखते हुए ऐसा ही लग रहा है कि जातीय सिक्का इस चुनाव में जमकर चला है.

इस समय बीजेपी नेता उपेंद्र दत्त शुक्ल मात्र 1666 वोट से आगे हैं. बीजेपी प्रत्याशी सीएम योगी आदित्यनाथ की सीट पर संघर्ष करता नजर आ रहा है. सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद को न सिर्फ सपा बल्कि पीस पार्टी और निषाद पार्टी का भी समर्थन है.

इन पार्टियों की गोलबंदी के बाद ही बीजेपी को गोरखपुर में मछुआरा सम्मेलन करवाना पड़ा था. जिसमें बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडे ने कहा था "भगवान राम के सबसे करीब निषाद समाज रहा है. यह समाज श्रीराम का है तभी भाजपा के साथ है. निषाद समाज के सहयोग से ही बीजेपी लगातार जीत रही है..."

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ CM yogi Adityanath बीजेपी गोरखपुर सीट हारी तो योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ा झटका होगा

जातीय समीकरण को देखते हुए इस बार सपा ने निषाद पार्टी के प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया. इसीलिए बीजेपी ने निषाद वोटरों को साधने के लिए मछुआरा सम्मेलन करवा दिया. विकास की बात करने वाली दोनों पार्टियों ने गोरखपुर में जातीय गणित देखते हुए अलग-अलग जातियों को मैदान में उतारा.

जाति हावी रही, इसका उदाहरण देखिए  

सपा ने चुनाव प्रचार की कमान पिछड़े वर्ग के नेताओं को सौंपी. विधान परिषद सदस्य रामसुन्दर दास निषाद, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद, एमएलसी राजपाल कश्यप, रामजतन राजभर, रामनगीना साहनी, रामदुलार राजभर, विश्वनाथ विश्वकर्मा एवं एमएलसी लीलावती कुशवाहा अपनी-अपनी जातियों का वोट सपा के पक्ष में करवाने के लिए लगाए गए थे.

बीजेपी ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, यूपी के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, होमगार्ड एवं सैनिक कल्याण मंत्री अनिल राजभर, मंत्री जय प्रकाश निषाद, दारा सिंह चौहान, स्वामी प्रसाद मौर्य, सांसद पंकज चौधरी, यूपी बीजेपी के सह प्रभारी रामेश्वर चौरसिया, बीजेपी में मछुआरा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मनोज कश्यप आदि को चुनाव प्रचार में लगाया था. इनका काम अपनी जाति के वोटरों को बीजेपी के पक्ष में लुभाने का था.
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