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OPINION: छवि निखारने में जुटा विश्व हिंदू परिषद, बदल रहा है चाल, चरित्र और चेहरा

अमिताभ सिन्हा | News18India
Updated: December 13, 2019, 6:34 PM IST
OPINION: छवि निखारने में जुटा विश्व हिंदू परिषद, बदल रहा है चाल, चरित्र और चेहरा
संसद के मौजूदा सत्र के दौरान लगभग 400 कार्यकर्ता छोटी छोटी टोलियों में दिल्ली पहुंचे हैं. (File Photo)

संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र (Winter Session Of Parliament) के दौरान देश के हर राज्य से विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) के 400 कार्यकर्ताओं की टोलियां दिल्ली पहुंची है. कार्यकर्ताओं ने सिर्फ बीजेपी (BJP) ही नहीं, बल्कि सभी पार्टियों के सांसदों से मिलने का समय मांगा.

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  • Last Updated: December 13, 2019, 6:34 PM IST
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नई दिल्ली. 1960 के दशक में हिंदूओं (Hindus) के हितों की रक्षा के लिए बने विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) ने एक लंबा सफर तय कर लिया है. गोरक्षा, धर्मांतरण जैसे मुद्दों से आगे बढ़ते हुए वीएचपी ने राम जन्मभूमि आंदोलन जैसा आंदोलन चलाया. सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि पर फैसले के बाद खुद बीजेपी के भीष्म पितामह लाकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने आजादी के बाद का सबसे बड़ा जन आंदोलन बताया था. सुप्रीम कोर्ट के बाद अब तो मंदिर का निर्माण शुरू होने की कगार पर है और सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कह दिया है कि अब संघ किसी भी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा तो वीएचपी करे भी तो क्या? अब तल्ख बयानों और कड़े तेवर मायने नहीं रखते हैं, लेकिन हिंदू हितों को साधे रखना है इसलिए वीएचपी ने थोड़ा चाल चरित्र औऱ चेहरा बदलना शुरु कर दिया है.

देश के हर कोने से दिल्ली पहुंची कार्यकर्ताओं की टोलियां

संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र (Winter Session Of Parliament) के दौरान देश के हर राज्य से विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता टोलियों में दिल्ली पहुंचे. बीएचपी सूत्र बताते हैं कि इस संसद सत्र के दौरान लगभग 400 कार्यकर्ता छोटी छोटी टोलियों में दिल्ली पहुंचे हैं. सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि सभी पार्टियों के सांसदों से मिलने का समय मांगा. जिन सांसदों से मिले उन्हे विश्व हिंदू परिषद की पुस्तिकाएं दीं और ये भी समझाया कि उनका ऐजेंडा सिर्फ हिंदू हितों की रक्षा करना है. अपने इस एजेंडा को पूरा करने के लिए वीएचपी के कार्यकर्ताओं ने सांसदों का सहयोग भी मांगा. सांसदों को ये भी बताया गया कि हिंसा या फिर तल्खी की वकालत विश्व हिंदू परिषद नहीं करता है.

वीएचपी ने छवि बदलने की शुरुआत वर्ष 2014 में ही कर दी थी

सांसदों से मुलाकात की इस मुहिम की शुरुआत वर्ष 2014 में ही हो गयी थी. इसके पहले गंगा की सफाई और फिर गो रक्षा को लेकर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता तमाम सांसदों से मिले थे, लेकिन वर्ष 2019 कुछ नया लेकर आया है. इस बार संसद में भी वीएचपी की ये टोलियां नजर आयीं. जाहिर है राम मंदिर जैसे आंदोलन को मुकाम पर पहुंचाने के बाद अब उन्हें लगने लगा है कि अब उग्र तेवरों की जरुरत नहीं रह गई है. जरुरत तो सिर्फ एक ही है और वो यह है कि हिंदू हितों के नाम पर सांसदों को एकजुट करना और छवि कुछ ऐसी बदलना ताकि लोग वीएचपी से जुड़ने से परहेज नहीं करें.

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First published: December 13, 2019, 6:33 PM IST
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