इस यूनिवर्सिटी में छात्र दीवारों पर लिखते हैं मन की बात, बोले यह हमारा पुराना चलन

छात्रों के मामलों पर दीवारें विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच चल रहे टकराव से रंगी हुई मिल जाएंगी. शायद यह ही वजह है कि जेएनयू को वार्षिक विजिटर्स अवार्ड भी मिल चुका है.

News18Hindi
Updated: August 21, 2019, 11:03 AM IST
इस यूनिवर्सिटी में छात्र दीवारों पर लिखते हैं मन की बात, बोले यह हमारा पुराना चलन
फाइल फोटो- जेएनयू में दीवारों पर लिखकर या पोस्टर लगाकर अपनी बात कहने का यह तरीका काफी समय से इस्तेमाल हो रहा है.
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Updated: August 21, 2019, 11:03 AM IST
मामला चाहें महंगाई का हो या फिर दलित, आदिवासी उत्पीड़न, किसानों की आत्महत्या और विदेशी दखलअंदाजी का मामला हो...अगर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) (JNU) की दीवारों पर नज़र दौड़ाईएगा तो राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों पर कोई न कोई विचार या नारा लिखा दिखाई दे जाएगा. ऐसा भी नहीं है कि यहां के छात्र सिर्फ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर ही मन की बात को दीवारों पर लिखते हैं. एडमिशन पॉलिसी में बदलाव, एमफिल-पीएचडी (Mphil-Phd) में सीटों या छात्रों के दूसरे मामलों पर दीवारें विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच चल रहे टकराव से रंगी हुई मिल जाएंगी. शायद यह ही वजह है कि जेएनयू को वार्षिक विजिटर्स अवार्ड भी मिल चुका है.

अब विवादों में है जेएनयू की दीवारें

जेएनयू में छात्रसंघ चुनावों की सरगर्मियां जोर-शोर से चल रही हैं. संगठन लेफ्ट हो या राइट, सभी अपने-अपने मुद्दे लेकर छात्रों के बीच जा रहे हैं. कुछ पोस्टर और दीवारों का सहारा भी ले रहे हैं. लेकिन कुछ दिन पहले ही जेएनयू प्रशासन ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष एन. साईं बालाजी को एक नोटिस जारी किया है. नोटिस दीवारों पर पोस्टर लगाने के संबंध में दिया गया है. नोटिस के जवाब में बालाजी का कहना है “जेएनयू में दीवारों पर अपनी बात कहने का चलन है. जेएनयू लोकतंत्र के तहत हमे अपनी बात कहने की आज़ादी देता है. यह आज से नहीं हो रहा है, इतिहास उठाकर देखें तो दीवारों पर लिखकर अपनी बात कहने का चलन है.”

दीवारों पर लेफ्ट के नारे हैं तो राइट के पोस्टर भी हैं

जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस में पढ़े बीएसपी नेता सुधींद्र भदौरिया कहते हैं, “यहां के छात्र देश के संविधान का आदर करते हैं, देश की एकता मानते हैं लेकिन अगर कहीं अन्याय होता है तो उसका प्रतिकार भी करते हैं. वो समाज की भलाई के लिए अपनी बात रखते हैं, लेकिन देश तोड़ने की बात कोई भी करेगा तो वह गलत है.”

फाइल फोटो- जेएनयू में हर एक संगठन दीवार पर लिखकर ही अपनी बात कहता है. फिर चाहें मौका चुनावों का हो या किसी मुद्दे के विरोध का.


ऐसा भी नहीं है कि दीवारों पर सिर्फ वामपंथी संगठनों ने ही अपने नारे लिखे हुए हैं. यहां दक्षिणपंथी विचारों के भी पोस्टर दिखेंगे. जिसमे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) छात्रों की समस्याएं उठाने के साथ-साथ माओवाद, नक्सलवाद और देश के खिलाफ बात करने वालों की मुखालफत करती नजर आती है. यहां भगत सिंह के पोस्टर देखने को मिलेंगे तो डॉ. बीआर आंबेडकर और कार्ल मॉर्क्स के मैसे भी दीवारों पर लिखे हुए दिखाई दे जाएंगे.
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फाइल फोटो- हाल ही में जेएनयू प्रशासन ने दीवारों पर पोस्टर लगाने के पर एक छात्र को नोटिस जारी किया है.


3 साल से इसलिए विवादों में है जेएनयू

जेएनयू की छात्र राजनीति पर शुरू से ही वामपंथी छात्र संगठनों का वर्चस्व रहा है. 9 फरवरी 2016 को कैंपस में हुई कथित देश विरोधी नारेबाजी के चलते जेएनयू देश में विवाद का बड़ा केन्द्र बन गया. उसके बाद से लेकर अब तक कैंपस के अंदर और उसके बाहर वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधारा के छात्रों एवं नेताओं का टकराव जारी है.

फाइल फोटो- जेएनयू को बेस्ट सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के नाते वार्षिक विजिटर्स अवार्ड भी मिल चुका है.


सर्वश्रेष्ठ का खिताब मिला था जेएनयू को

जेएनयू को नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिएशन काउंसिल (नैक) ने जुलाई 2012 में किये गए सर्वे में देश का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय माना था. जेएनयू को बेस्ट सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के नाते वार्षिक विजिटर्स अवार्ड भी मिल चुका है. जेएनयू में देश-विदेश के करीब साढ़े आठ हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं. जेएनयू कई पूर्व छात्र कहते हैं कि कि यहां पढ़ने वाले जितनी कैंपस के अंदर की समस्याएं उठाते हैं उतनी ही कैंपस से बाहर की भी

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First published: August 21, 2019, 11:03 AM IST
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