...जब शीला दीक्षित को यूपी सरकार ने 23 दिन तक जेल में रखा था

शीला दीक्षित का नाम आते ही देश की राजधानी दिल्ली का विकास अपने आप सामने आ जाता है. दिल्ली के विकास और शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) का नाता कैसा था, इसका उदाहरण हमें उनके आखिरी ट्वीट से ही मिल जाता है.

Niraj Kumar | News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 9:56 PM IST
...जब शीला दीक्षित को यूपी सरकार ने 23 दिन तक जेल में रखा था
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) अब हमारे बीच नहीं रहीं (File Photo)
Niraj Kumar
Niraj Kumar | News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 9:56 PM IST
स्तब्ध हूं क्योंकि कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) अब हमारे बीच नहीं रहीं. उम्र भले ही 81 वर्ष की थी लेकिन उनकी निजी और राजनीतिक सक्रियता से ऐसा कभी महसूस भी नहीं हुआ कि इतनी जल्दी वो हमें छोड़ कर चली जायेंगी. 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पिछले 6 वर्षों में निजामुद्दीन ईस्ट के उनके आवास पर राजनीतिक मसलों पर प्रतिक्रिया या कई बार मुलाकत के लिये जब भी जाना होता तो दूसरी मंजिल के ड्राइंग रूम में वो किसी न किसी कार्यकर्ता से मिलती हुई दिखती और ये सिलसिला कभी बंद नहीं हुआ.

शीला दीक्षित का नाम आते ही देश की राजधानी दिल्ली का विकास अपने आप सामने आ जाता है. दिल्ली के विकास और शीला दीक्षित का नाता कैसा था, इसका उदाहरण हमें उनके आखिरी ट्वीट से ही मिल जाता है. 5 जुलाई को आम बजट पेश होने के बाद अपने आखिरी ट्वीट में शीला दीक्षित ने आम बजट में दिल्ली को कुछ न मिलने पर आम बजट को निराश करने वाला बताया था, ठीक इससे एक दिन पहले यानि 4 जुलाई के ट्वीट में उन्होंने बजट में दिल्ली के हित को ध्यान में रखने की उम्मीद जताई थी.

शीला दीक्षित का आखिरी ट्वीट


दरअसल शीला दीक्षित के निधन से दिल्ली में एक राजनीतिक युग का अंत हो गया है. 1998 से लेकर 2013 तक दिल्ली को पुराने महानगर से निकालकर एक आधुनिक, विकसित और खूबसूरत शहर दिलाने का श्रेय शीला दीक्षित को ही जाता है.

1990 में यूपी सरकार ने 23 दिन तक जेल में रखा था
पंजाब के कपूरथला में 31 मार्च, 1938 को जन्मीं शीला दीक्षित के जीवन का ज्यादातर हिस्सा दिल्ली में बीता. दिल्ली में पढ़ाई हुई और शादी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से. 1984 से 1989 तक शीला दीक्षित ने उत्तर प्रदेश के कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद के साथ-साथ राजीव गांधी सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में बतौर राज्य मंत्री काम भी किया. राजनीतिक सक्रियता का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1990 में महिलाओं पर ज्यादती के खिलाफ आवाज उठाने पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने उन्हें 23 दिनों तक जेल में रखा.

1998 में पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव भले ही हार गई लेकिन इसी साल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और 1998 से 2013 तक न सिर्फ दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं, बल्कि देश की राजधानी के विकास को नये मुकाम तक पहुंचाया. इसमें अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिये कि दिल्ली के मौजूदा विकास की नींव शीला दीक्षित ने ही रखी.
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शीला दीक्षित


केरल की राज्यपाल भी रहीं शीला दीक्षित
2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद शीला दीक्षित को केरल के राज्यपाल के पद पर रहीं और फिर कांग्रेस ने 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया. जिसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन की वजह से बाद में वापस ले लिया गया. इसी साल यानि 2019 की शुरुआत में शीला दीक्षित को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था और अपने निधन तक वो इस पद पर रहीं.

शीला दीक्षित के निधन के बाद जिस तरह से सभी दलों के राजनितिक दिग्गजों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की वो बताने के काफी है कि राजनीति में वो अपनी कैसी विरासत और कद छोडक़र गई हैं.

(नोट- नीरज कुमार रिपोर्टर के तौर पर तकरीबन डेढ दशक से कांग्रेस की गतिविधियों को देखते रहे हैं.)

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First published: July 20, 2019, 6:49 PM IST
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