रेल अधिकारी क्यों कर रहे हैं आचार संहिता लागू होने का इंतज़ार?

भारतीय रेल में नई ट्रेनों की मांग सबसे ज़्यादा उत्तर रेलवे से जुड़ी होती हैं. इसकी एक बड़ी वजह है उत्तर रेलवे का विशाल क्षेत्र जो बनारस से जम्मू कश्मीर तक फैला है.

Chandan Kumar | News18Hindi
Updated: February 6, 2019, 10:31 PM IST
रेल अधिकारी क्यों कर रहे हैं आचार संहिता लागू होने का इंतज़ार?
प्रतीकात्मक तस्वीर
Chandan Kumar | News18Hindi
Updated: February 6, 2019, 10:31 PM IST
चुनाव करीब आते ही भारतीय रेल पर भी दबाव बढ़ जाता है. संसद से लेकर नेता तक अपनी अनगिनत मांगे रेल मंत्रालय के सामने रखते हैं. सूत्रों के मुताबिक पिछले पांच साल में रेलवे के पास अलग अलग ट्रेनों के 11 हज़ार स्टॉपेज, 4 हज़ार नई ट्रेनों की मांग और सैंकड़ों ट्रेनों के एक्सटेंशन की मांग पहुंची है. लेकिन, चुनाव क़रीब आते ही रेलवे पर इन मांगों को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है.

भारतीय रेल में नई ट्रेनों की मांग सबसे ज़्यादा उत्तर रेलवे से जुड़ी होती हैं. इसकी एक बड़ी वजह है उत्तर रेलवे का विशाल क्षेत्र जो बनारस से जम्मू कश्मीर तक फैला है. दूसरी वजह है, यहां देश की राजधानी दिल्ली का मौजूद होना. हालांकि बाक़ी इलाके और स्थानीय मांगों की भी रेलवे में भरमार होती है.



सूत्रों के मुताबिक आंकड़े बताते हैं कि रेल मंत्रालय के पास बीते क़रीब 5 साल में 11 हज़ार स्टेशनों पर ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग की गई है. जबकि चार हजार नई रेल गाड़ियों और सैकड़ों मौजूदा ट्रेनों के विस्तार की भी मांग की गई है. ये मांगें आमतौर पर स्थानीय जन प्रतिनिधि या सांसदों की हैं. इसके अलावा बड़े नेताओं, विधायकों और संगठनों की तरफ से भी ऐसी मांगे की गई हैं.

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उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार के कहा, 'हमारे पास मांग जन प्रतिनिधियों से आती हैं. पैसैंजर एसोसिएशन की आती हैं. लेकिन, हम किसी भी मांग को पूरी वायबिलिटी से देखते हैं. उसके बाद ही अस्थाई तौर पर 6 महीने के लिए नया स्टॉपेज देते हैं. फिर 6 महीने के आंकड़ों के हिसाब से फैसला करते हैं.'

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हालांकि रेल मंत्रालय ने रेलवे के हालात के मुताबिक अब तक 200 से 250 तक नए स्टॉपेज दिए हैं. जबकि इस सरकार ने कई नई ट्रेनें भी चलाई हैं. लेकिन, सूत्रों के मुताबिक चुनाव क़रीब आने से जनप्रतिनिधियों के लगातार दबाव के कारण रेलवे की परेशानी भी बढ़ गई है. फिलहाल रेलवे की ये परेशानी 2019 लोकसभा चुनावों के ऐलान के बाद ही ख़त्म होगी. क्योंकि एक बार आचार संहिता लागू हो जाए. फिर न तो किसी नई ट्रेन का ऐलान हो सकता है और न ही किसी स्टॉपेज का.
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