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राहुल गांधी का अध्यक्ष बने रहना क्यों सूट करता है बड़े नेताओं को?

Ranjeeta Jha | News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 2:19 PM IST
राहुल गांधी का अध्यक्ष बने रहना क्यों सूट करता है बड़े नेताओं को?
राहुल गांधी (फाइल फोटो)

राहुल गांधी के इस्तीफे को नामंजूर करते हुए वर्किंग कमिटी ने एक प्रस्ताव लाकर उन्हें कांग्रेस में किसी भी तरह का बदलाव करने की जिम्मेदारी दे दी.

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2019 लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के ठीक बाद कांग्रेस की सर्वोच्च कमिटी की बैठक बुलाई गई. चर्चा हार के कारणों पर होनी चाहिए थी, लेकिन पूरी बैठक सिर्फ इसपर केंद्रित रही कि किसी तरह राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा न दें और अगर इस्तीफा दें भी तो वर्किंग कमिटी उसे स्वीकार न करे. हुआ भी ऐसा ही राहुल गांधी ने वर्किंग कमिटी में सभी नेताओं को सुना और जब राहुल गांधी के बोलने का समय आया तो उन्होंने दो टूक कहा, मैं हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश करता हूं, मुझे कोई भी रिप्लेस कर सकता है, सिर्फ गांधी परिवार ही क्यों?

लेकिन राहुल गांधी के इस्तीफे को नामंजूर करते हुए वर्किंग कमिटी ने एक प्रस्ताव लाकर उन्हें कांग्रेस में किसी भी तरह का बदलाव करने की जिम्मेदारी दे दी. लेकिन राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे और वर्किंग कमिटी की बैठक खत्म की गई. अब सवाल ये की राहुल गांधी से वर्किंग कमिटी के नेताओं को इतना प्यार क्यों?

सिर्फ वर्किंग कमिटी के नेताओं पर नजर डालें तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मल्लिकार्जुन खड़गे, हरीश रावत, कुमारी शैलजा, रघुवीर मीणा, शीला दीक्षित, जितेंद्र सिंह, RPN सिंह, केएच मुन्निअप्पा, दीपेंद्र हुड्डा, सुष्मिता देव, अरुण यादव, जितिन प्रसाद लोकसभा चुनाव लड़े. जिनमे सिर्फ तीन नेताओं ने जीत हासिल की. इनमें सोनिया गांधी रायबरेली से, राहुल गांधी वायनाड से और गौरव गोगोई  कालियाबोर से चुनाव जीते. जाहिर तौर पर अगर राहुल गांधी इस्तीफा देंगे तो सवाल वर्किंग कमिटी के इन नेताओं पर भी उठेंगे और नैतिक तौर पर उन्हें भी इस्तीफा देना होगा.

खराब प्रदर्शन के लिए CM को भी लेनी होगी जिम्मेदारी?

वहीं, अलग-अलग राज्यों की बात करें तो तीन महीने पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई और तीनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी. उम्मीद जताई जा रही थी कि तीनों राज्यों के 64 सीटों पर पार्टी बेहतर करेगी. लेकिन राजस्थान-0, मध्यप्रदेश-1 और छत्तीसगढ़ में दो, यानी कुल तीन सीटें ही पार्टी के खाते में आईं. ऐसे में क्या खराब प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री भी हटाए जाएं? हार पर ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं, जिसका जवाब पाना इतना आसान नहीं होगा.

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First published: May 27, 2019, 2:04 PM IST
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