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अजित पवार ने शरद पवार से क्यों की बगावत, कहीं यह वजह तो नहीं?

News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 4:52 PM IST
अजित पवार ने शरद पवार से क्यों की बगावत, कहीं यह वजह तो नहीं?
एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ उनके भतीजे अजित पवार (File Photo)

"एनसीपी (NCP) में उत्तराधिकार को लेकर शरद पवार (Sharad Pawar) और अजित पवार (Ajit Pawar) में कहीं न कहीं मनभेद हो गया था. बीजेपी ने इसे भांपकर होमवर्क किया और वो इसमें सफल रही. कांग्रेस-शिवसेना और एनसीपी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाते रहे और बीजेपी ने अजित पवार को साधकर सरकार बना ली."

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  • Last Updated: November 23, 2019, 4:52 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार में पिछले कुछ माह से सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा था. 23 अप्रैल की सुबह जब शरद पवार (Sharad Pawar) के भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) ने देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के साथ डिप्टी सीएम पद की शपथ ली तो यह बात और मजबूत हो गई. उनके शपथ ग्रहण के कुछ देर बाद चाचा शरद पवार ने उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. पार्टी की एक कमेटी अजित पवार पर फैसला लेगी. सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार कह रहे हैं, "अगर अजित पवार बीजेपी के साथ गए हैं तो इसमें कई वजहें होंगी. इसमें एक वजह छोटी-छोटी नाराजगियां भी होंगी."

डीयू के एसाेसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि "एनसीपी में उत्तराधिकार को लेकर शरद पवार और अजित पवार में कहीं न कहीं मनभेद हो गया था. बीजेपी ने इसे भांपकर होमवर्क किया और वो इसमें सफल रही. कांग्रेस-शिवसेना और एनसीपी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाते रहे और बीजेपी ने अजित पवार को साधकर सरकार बना ली."

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एक महीने तक चले ड्रामे के बाद 23 नवंबर की सुबह देवेंद्र फडणवीस सीएम बने. (File Photo)


अजित की जगह पार्टी में बड़ा होने लगा था सुप्रिया सुले का कद

विधानसभा चुनाव से ऐन पहले अजित पवार ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था. सुबोध कुमार के मुताबिक, इसे अजित की निराशा से जोड़कर देखा जाना चाहिए था.  इसकी एक वजह भी है. एक वक्त ऐसा था जब तय माना जाने लगा था कि अजित पवार ही शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उनकी जगह एनसीपी प्रमुख की बेटी सुप्रिया सुले का कद पार्टी में बड़ा होने लगा था.

अजित ने चाचा शरद पवार से ही सीखी राजनीति
एनसीपी ने महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार के खिलाफ यात्रा निकाली, लेकिन उसका नेतृत्व अजित पवार की बजाय पार्टी के दूसरे नेताओं के पास था. बताया जाता है कि यहीं से अजित के दिल में यह बात घर कर गई कि उन्हें किनारे लगाने की कोशिश हो रही है. हालांकि, अजित ने कभी भी खुलकर ऐसी बातों को नहीं स्वीकारा. अजित ने अपने चाचा शरद पवार से ही राजनीति सीखी है. लिहाजा उन्होंने अपना दांव चलने के लिए ऐसा मौका चुना कि शिवसेना और एनसीपी में उन्हें किनारे करने वाले नेताओं की राजनीति धरी रह जाए.
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First published: November 23, 2019, 3:52 PM IST
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