RSS पर इस तरह हमलावर क्यों हैं राहुल गांधी?

क्या राहुल गांधी को आरएसएस की उस ताकत से परेशानी है, जो कांग्रेस के सबसे बड़े विरोधी दल बीजेपी को मजबूत करती है?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 28, 2018, 1:08 PM IST
RSS पर इस तरह हमलावर क्यों हैं राहुल गांधी?
राहुल गांधी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दिक्कत क्या है?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 28, 2018, 1:08 PM IST
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 6 मार्च, 2014 को महाराष्ट्र के भिवंडी इलाके की एक रैली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर महात्मा गांधी की ‘हत्या’ में शामिल होने का आरोप लगा दिया था. इसे लेकर उनके खिलाफ मानहानि का केस चल रहा है. इसके बावजूद उन्होंने यूरोप की धरती से संघ की तुलना अरब देशों में सक्रिय संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से कर दी. आरएसएस, बीजेपी पर देश  में नफरत फैलाने का आरोप लगा दिया. आखिर क्यों वो बार-बार संघ को निशाने पर ले रहे हैं? क्या इसकी कोई सियासी वजह है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी बार-बार संघ पर निशाना साध रहे हैं तो इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि संघ उस बीजेपी को बैकअप देता है जो कांग्रेस की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी पार्टी है. संघ की ताकत उन्हें राजनीतिक तौर पर उसकी आलोचना करने के लिए बाध्य करती है.

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस की तुलना मुस्‍लिम ब्रदरहुड से की है.  मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का सबसे पुराना और सबसे बड़ा इस्लामी संगठन है. इसे सबसे प्रमुख इस्लामी पुनरुत्थानवादी राजनीतिक समूहों में से एक के रूप में जाना जाता है. पिछले कुछ सालों में मुस्लिम ब्रदरहुड पर मध्य पूर्व में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं.

 Rashtriya Swayamsevak Sangh, RSS, congress, Rahul Gandhi, Muslim Brotherhood, BJP, Hindu organization, Sangh Parivar, rise of the Saffron brigade, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आरएसएस, राहुल गांधी, मुस्‍लिम ब्रदरहुड, हिंदू संगठन, संघ परिवार, भाजपा, भगवा ब्रिगेड का उदय, congress politics,      आरएसएस का समरसता कार्यक्रम (File Photo)

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार का कहना है कि राहुल न तो संघ को जानते हैं और न ही भारत को. उनकी बातों में किसी तरह की कोई गंभीरता नहीं है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं “अपनी राजनीतिक यात्रा में लगातार फेल होते राहुल गांधी आरएसएस के सहारे अपनी इमेज को बड़ा करना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने मानहानि के एक मुकदमे के बावजूद विदेशी धरती से उस पर वार किया. वो जानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी विरोधी पार्टी को आगे बढ़ने के लिए खाद पानी संघ से मिलता है. इसलिए वे बीजेपी से अधिक उसकी जड़ पर प्रहार कर रहे हैं.”

ये भी पढ़ें: आखिर क्या है मुस्‍लिम ब्रदरहुड, जिसके जरिये RSS पर निशाना साध रहे हैं राहुल

कुमार के मुताबिक “राहुल गांधी की ये पॉलिसी ठीक नहीं दिखती. इसमें दूरदर्शिता का अभाव है. उनके पास कांग्रेस सेवादल था जो खत्म होने के कगार पर है. आरएसएस के स्ट्रक्चर से सीख लेते हुए उन्हें संघ के मुकाबले सेवादल को आगे बढ़ाना चाहिए था. आरएसएस की आलोचना से उतना फायदा नहीं मिलेगा, जितना सेवादल को मजबूत करने से मिलता.”

संघ की तरह ही कांग्रेस ने भी एक संगठन बनाया था ‘सेवा दल’. इसकी स्थापना 1 जनवरी 1924 को डॉ. नारायण सुब्बाराव हार्डिकर ने की थी. जबकि इसके करीब दो साल बाद 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में संघ की स्थापना की. संघ से दो साल पहले बना सेवादल न सिर्फ उसके मुकाबले काफी पिछड़ गया बल्कि अब उसे पुनजीर्वित करने की जरूरत महसूस की जा रही है. राहुल गांधी को संघ और सेवादल की ताकत से जुड़ी तुलना की टीस भी है.

ये भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव 2019: ये है आरएसएस, बीजेपी का दलित प्लान!

आरएसएस में दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रमुख राजीव तुली कहते हैं “राहुल गांधी को लगता है कि संघ पर टारगेट करके कांग्रेस को मुस्लिमों का वोट मिलेगा, जबकि यह सिर्फ उनका भ्रम है.”

 Rashtriya Swayamsevak Sangh, RSS, congress, Rahul Gandhi, Muslim Brotherhood, BJP, Hindu organization, Sangh Parivar, rise of the Saffron brigade, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आरएसएस, राहुल गांधी, मुस्‍लिम ब्रदरहुड, हिंदू संगठन, संघ परिवार, भाजपा, भगवा ब्रिगेड का उदय, congress politics,       राहुल गांधी (File Photo)

क्या संघ की ताकत से परेशान होते हैं राहुल?

आरएसएस भारत का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है. शहर और गांव मिलाकर करीब 83 हजार स्थानों पर संघ की शाखा, साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली लगती है. इस समय संघ की करीब 59 हजार शाखाएं काम कर रही हैं. इनके अलावा 24,500 साप्ताहिक मिलन और संघ मंडली सक्रिय हैं. जानकारों की माने तो देश भर में एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं.

आरएसएस में दिल्ली प्रांत के प्रचार प्रमुख राजीव तुली बताते हैं “संघ में 10 हजार की जनसंख्या पर एक बस्ती मानी जाती है. 10 बस्तियों को मिलाकर एक नगर या खंड मानते हैं. इस एक लाख की आबादी को हम एक स्थान मानते हैं. स्वयंसेवकों की सही संख्या बताना कठिन है, लेकिन एक जगह पर कम से कम इससे सौ लोग तो जुड़े होते ही हैं. उनके साथ उनका परिवार भी जुड़ता है.” सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी को आरएसएस की इस ताकत से परेशानी है, जो बीजेपी को मजबूत करती है?

राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया का मानना है कि “राहुल गांधी जान बूझकर आरएसएस पर टारगेट कर रहे हैं. क्योंकि उन्हें पता है कि ऐसा करने से संघ से अधिक बीजेपी के नेता तिलमिलाएंगे. उनका काउंटर करने के लिए बयानबाजी करेंगे, जिसमें विवाद पैदा होगा. ऐसा होने से वो सुर्खियों में रहेंगे. दरअसल, इस वक्त राहुल गांधी की जद्दोजहद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुकाबले मीडिया की हेडलाइन में बने रहने की है. जितनी विवादित बात कहेंगे उतना फायदा होगा.”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा

हिंदू राष्ट्रवाद का प्रबल समर्थक आरएसएस देश में सत्तारुढ़ राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी का पैतृक संगठन माना जाता है. हालांकि, संघ से जुड़े लोग कहते हैं कि यह सामाजिक संगठन है और बीजेपी के फायदे के मकसद से कोई कार्यक्रम नहीं करता है. लेकिन ये जरूर कहते हैं कि संघ के कार्यक्रमों से जो वातावरण बनता है उसका फायदा बीजेपी को मिलता है, क्योंकि दोनों की विचारधारा मिलती है.

 Rashtriya Swayamsevak Sangh, RSS, congress, Rahul Gandhi, Muslim Brotherhood, BJP, Hindu organization, Sangh Parivar, rise of the Saffron brigade, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आरएसएस, राहुल गांधी, मुस्‍लिम ब्रदरहुड, हिंदू संगठन, संघ परिवार, भाजपा, भगवा ब्रिगेड का उदय, congress politics,        आरएसएस मुख्यालय में प्रणब मुखर्जी (File Photo)

2014 में सत्ता हासिल करने वाली बीजेपी के लिए 2019 का किला फतह करना आसान नहीं माना जा रहा. विपक्ष लामबंद होकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है. लेकिन बीजेपी के लिए राहत की बात संघ की सक्रियता है.

इस साल संघ ने हिंदी पट्टी के राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार में कई कार्यक्रम किए हैं. संघ की इस कसरत से बीजेपी की सेहत सुधरने की उम्मीद लगाई जा रही है. एक धारणा ये भी बन रही है कि आरएसएस अपनी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए बीजेपी के लिए 2019 की चुनावी जमीन तैयार कर रही है. संघ में मुस्लिमों और दलितों दोनों को जोड़ने का प्लान है.

सियासी जानकारों का कहना है कि संघ न सिर्फ स्वयंसेवकों में जोश भरने का काम कर रहा है बल्कि जनता की नब्ज भी टटोल रहा है. लोकसभा चुनाव से पहले जनता का मूड भांपा जा रहा है. लोगों की समस्याएं और उनकी उम्मीदें पता की जा रही हैं. राहुल गांधी को ये दिक्कत भी हो सकती है.

संघ के कार्यक्रम में गए थे गांधी, आंबेडकर, जेपी

1934 में महात्मा गांधी और 1939 में डॉ. बीआर आंबेडकर वर्धा के संघ शिक्षा वर्ग में गए थे. यही नहीं स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण 3 नवंबर 1977 को पटना के प्रशिक्षण शिविर में गए थे और वहां भाषण भी दिया था. ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ नामक किताब के लेखक नरेंद्र सहगल के मुताबिक 'संघ के कार्यक्रमों में मदन मोहन मालवीय आए थे, सुभाष चंद्र बोस ने 1938 या 1939 में नागपुर में पथ संचलन देखा था. संघ की नीति रही है समन्वय, संपर्क और संवाद. ये भारतीय संस्कृति है.

 Rashtriya Swayamsevak Sangh, RSS, congress, Rahul Gandhi, Muslim Brotherhood, BJP, Hindu organization, Sangh Parivar, rise of the Saffron brigade, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आरएसएस, राहुल गांधी, मुस्‍लिम ब्रदरहुड, हिंदू संगठन, संघ परिवार, भाजपा, भगवा ब्रिगेड का उदय, congress politics,       मोहन भागवत और अमित शाह (File Photo)

इस साल पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (कांग्रेस के वरिष्ठ नेता) भी नागपुर स्थित संघ मुख्यालय के एक कार्यक्रम में गए थे. संघ प्रमुख के साथ उन्होंने मंच शेयर किया था. अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में आने से पहले संघ के प्रचारक थे. नरेंद्र मोदी भी प्रचारक रह चुके हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी संघ से जुड़े रहे हैं. तुली कहते हैं कि कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द रॉक मेमोरियल का उद्घाटन इंदिरा गांधी ने किया था, जबकि उसे बनवाने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह एकनाथ रानडे ने किया था.
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर