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बीजेपी की 'मजबूरी' का नाम महात्मा गांधी क्यों है?

बीजेपी की 'मजबूरी' का नाम महात्मा गांधी क्यों है?

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क्या यह माना जाना चाहिए कि बड़े ब्रांड वैल्यू की वजह से स्वच्छ भारत अभियान और ग्राम स्वराज के बहाने बीजेपी ने कांग्रेस से महात्मा गांधी को राजनीतिक तौर पर टेकओवर करने की कोशिश शुरू कर दी है?

    जनवरी 2017 में खादी ग्रामोद्योग आयोग के कैलेंडर में महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर छापी गई.

    इसके बाद हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा था, 'महात्मा गांधी ऐसा नाम है जो, जिस दिन से नोट पर चिपका है, उस दिन से नोट की वैल्यू गिरनी शुरू हो गई. गांधी जी धीरे-धीरे नोट से भी हटाए जाएंगे. खादी गांधी के नाम से पेटेंट नहीं है और खादी के साथ गांधी का नाम जुड़ने से खादी उठने की जगह डूब गई है. मोदी ज्यादा बड़े ब्रांड हैं. मोदी की तस्वीर कैलेंडर में छपते ही खादी की बिक्री में 14 फीसदी का इजाफा हुआ है.' (हालांकि विवाद बढ़ने के बाद विज ने इस बयान को वापस ले लिया था)

    इस वाकये के साल भर बाद अब मोदी सरकार महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के कार्यक्रमों के लिए मुख्यमंत्रियों की बैठक की. दरअसल, गांधी एक ऐसे ऐतिहासिक किरदार हैं, जो वक्त और देश के दायरों से परे हैं. जो दुनिया में महात्मा बुद्ध के बाद शांति और अहिंसा के सबसे बड़े दूतों में से एक माने जाते हैं. वह आज भी दुनिया में भारत का बहुत बड़ा ब्रांड हैं. गांधी ऐसे इंसान हैं जिसकी महानता को दुनिया के कई शख्सियतों ने सलाम किया था.

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    क्या इसीलिए गांधी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं. इसलिए गांधी और उनकी विरासत में सियासत कोई अवसर खोजती रहती है? क्या यह माना जाना चाहिए कि बड़े ब्रांड वैल्यू की वजह से स्वच्छ भारत अभियान और ग्राम स्वराज के बहाने बीजेपी ने कांग्रेस से महात्मा गांधी को राजनीतिक तौर पर टेकओवर करने की कोशिश शुरू कर दी है?

    इसका जवाब हमने दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार से लेने की कोशिश की. कुमार कहते हैं "भारत की तासीर गांधीवादी यानी अहिंसा, सर्वधर्म समभाव और भाईचारे की है. उनके विचार प्रकृति के सबसे नजदीक हैं. हिंदुस्तानी इससे अपने आपको जोड़ता है. इसलिए कांग्रेस ने भी अब तक गांधी सरनेम को अपनाया हुआ है. वो हर प्रोजेक्ट किसी न किसी गांधी के नाम पर बनाकर उसे वोटों में कन्वर्ट करती थी."

    कुमार के मुताबिक "गांधी की ब्रांड वैल्यू की वजह से ही अब बीजेपी भी गांधी नाम का इस्तेमाल करना चाहती है. इसलिए स्वच्छता अभियान में हर पोस्टर, होर्डिंग और विज्ञापन में मोदी के साथ-साथ महात्मा गांधी का चश्मा भी है. बीजेपी गांधी के नाम का इस्तेमाल अपनी सियासत को आगे बढ़ाने के लिए करना तो चाहती है लेकिन उनके विचारों को क्रियान्वित करने में उसे मुश्किल हो रही है."

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    भारत सरकार के स्वच्छता अभियान के वैसे तो कई ब्रांड एंबेसडर हैं, पर इसके सबसे एंबेसडर तो महात्मा गांधी ही हैं. जो हमारे बीच शरीर से न रहने के बावजूद लोगों को अपने विचारों से प्रेरणा दे रहे हैं. वे जीवन को अहिंसा, सर्वधर्म समभाव वाला और स्वच्छ बनाना चाहते थे. गांधी समाज की गंदगी धोने वालों को गरिमापूर्ण स्थान देने की हिमायत करते थे. अब मोदी सरकार का मंत्र है सबका साथ सबका विकास.

    '24 अकबर रोड' नामक किताब के लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई कहते हैं

    "भारत में महात्मा गांधी को नकार कर किसी के लिए भी राजनीतिक राह बनाना मुश्किल है. भाजपा ने पिछले कुछ दिनों से गांधी, बोस, पटेल और आंबेडकर के जरिए कांग्रेस पर वार किए हैं. यह बताने की कोशिश है कि इन लोगों के साथ कांग्रेस ने नाइंसाफी की है, हालांकि यह पूरा सच नहीं है. लेकिन बीजेपी के इस अटेंम्ट से कांग्रेस को नुकसान हुआ है. बीजेपी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रही है तो इसमें सौ फीसदी सियासी एलिमेंट है और वे जानते हैं कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा."


    किदवई के मुताबिक "बीजेपी और संघ गांधी की विचारधारा को स्वीकार नहीं करते. लेकिन वहां गांधी को इसलिए अपनाया जा रहा है क्योंकि इस पर पीएम नरेंद्र मोदी का जोर है. गांधी देश के ब्रांड के साथ-साथ ब्रांड गुजरात भी हैं. पटेल ब्रांड गुजरात भी हैं. इसलिए गांधी, पटेल और मोदी के बहाने यह दिखाने की कोशिश है कि आजादी से पहले, उसके बाद और अब 21वीं सदी का भारत बनाने में ब्रांड गुजरात का बहुत बड़ा योगदान है."

    यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि महात्मा गांधी, आजादी हासिल होने के बाद कांग्रेस पार्टी का विघटन कर देना चाहते थे. 'द कलेक्टेड वर्क्स ऑफ महात्मा गांधी' में इसका साफ तौर पर जिक्र बताया गया है. तो क्या कांग्रेस को भंग करने के गांधी वाले बयान को बीजेपी भुनाना चाहती है कि अब कांग्रेस की जरूरत ही क्या है? शायद इससे कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में बीजेपी को मदद मिले. महात्मा गांधी की आड लेकर ही नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव से पहले कहा था कि 'अब नकली गांधी देश चला रहे हैं.'

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    इस बारे में जब hindi.news18.com ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे से बात की तो उन्होंने कहा "बापू की विचार संपदा के वाहक हम ही हैं. बीजेपी अच्छी तरीके से गांधी जी के विचारों को आगे बढ़ा रही है. कांग्रेस ने तो महात्मा गांधी का रास्ता चुना ही नहीं. गांधी जी तो चाहते थे कि आजादी के बाद कांग्रेस को खत्म कर दिया जाना चाहिए. क्या उनकी इस बात को कांग्रेस ने कभी सुना और माना? जैसे आंबेडकर, पटेल की जयंती मनाई गई वैसे ही पार्टी और सरकार की ओर से बड़े स्तर पर महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाएगी. इसमें कोई राजनीति नहीं है."

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    Tags: BJP, Mahatma gandhi, Narendra modi

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