येदियुरप्पा के साथ ऐसा क्यों होता है?

बीएस येदियुरप्पा तीन बार सीएम बने लेकिन कार्यकाल एक भी पूरा नहीं कर पाए. एक बार सात दिन तो इस बार सिर्फ ढाई दिन में त्यागपत्र देना पड़ा

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 22, 2018, 3:01 PM IST
येदियुरप्पा के साथ ऐसा क्यों होता है?
अब क्या करेंगे बीएस येदियुरप्पा?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 22, 2018, 3:01 PM IST
बीएस येदियुरप्पा एक बार फिर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. सवाल तो आपके मन भी यही उठ रहा होगा कि येदियुरप्पा के साथ ऐसा क्यों होता है? जबकि वह तो ग्रहों की चाल के हिसाब से चल रहे थे. कर्नाटक का नाटक इतना बढ़ा कि तीसरी बार भी वह मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. सिर्फ ढाई दिन में त्यागपत्र देना पड़ा. नवंबर 2007 में वह सिर्फ सात दिन सीएम रहे थे. इसके बाद 2008 से 2011 तक उनका कार्यकाल तीन साल 62 दिन था.

येदियुरप्पा पहली बार 12 नवंबर, 2007 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे. सीएम बनने के बाद आठवें ही दिन 19 नवंबर, 2007 को उन्हें पद छोड़ना पड़ा था. गठबंधन सरकार में हुए समझौते के अनुसार मुख्यमंत्री पद पर दोनों दलों के नेताओं को बराबर-बराबर वक्त तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहना था. समझौते के तहत येदियुरप्पा ने जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी को फरवरी, 2006 में सीएम बनवा दिया था, लेकिन जब अक्टूबर, 2007 में येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री बनने का वक्त आया तो कुमारस्वामी मुकर गए और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.

नवंबर, 2007 में राष्ट्रपति शासन खत्म हुआ. 12 नवंबर 2007 को येदियुरप्पा कर्नाटक के सीएम बने. लेकिन मंत्रालयों में बंटवारे को लेकर विवाद हुआ और उनको 19 नवंबर, 2007 को त्यागपत्र देना पड़ा.

कर्नाटक चुनाव, पीएम मोदी, कांग्रेस, बीजेपी, सिद्धारमैया, Karnataka Election 2018, Assembly Elections 2018, PM Modi, BJP, Congress       (फाइल फोटो- बीएस येदियुरप्पा)

इसके बाद वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिली.  येदियुरप्पा ने 30 मई 2008 को दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली. लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार के मामलों में उनका नाम लिया. बीजेपी दबाव में आ गई फिर उन्होंने 31 जुलाई 2011 को पद से इस्तीफा दे दिया.
इस बार बीजेपी को बहुमत से आठ सीटें कम मिलीं. फिर भी राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी के नाते उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया. बृहस्पतिवार को उन्होंने सीएम पद की शपथ ली. लेकिन वे बहुमत साबित करने का जादुई आंकड़ा नहीं जुटा सके. इसलिए इमोशनल भाषण के साथ उन्हें त्यागपत्र सौंपना पड़ा.
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया कहते हैं "जब कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर लिया था तो बीजेपी का सरकार बनाने का दावा पेश करना गलत था. पहली बार बीजेपी का दांव राजनैतिक तौर पर उल्टा पड़ गया. साथ ही विपक्ष ने भी साझी रणनीति बनाकर बीजेपी को बिहार से लेकर गोवा तक में घेरना शुरू किया. विपक्ष ने अपने विधायकों को साधे रखा. इसलिए येदियुरप्पा को इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा."

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