स्कूलों के आसपास ड्रग पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की गई

स्कूलों के आसपास ड्रग पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम

स्कूलों के आसपास ड्रग पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम

स्कूलों के आसपास ही नशीली दवाएं उपलब्ध होने और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के इनकी गिरफ्त में आने पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में एक सदस्य ने सरकार से इस खतरे पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है.

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स्कूलों के आसपास ही नशीली दवाएं उपलब्ध होने और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के इनकी गिरफ्त में आने पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में एक सदस्य ने सरकार से इस खतरे पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है.

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के डॉ टी सुब्बीरामी रेड्डी ने कहा कि हालिया अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में करीब 25,000 बच्चे नशीली दवाओं की लत की गिरफ्त में हैं और यह ड्रग स्कूलों के आसपास ही उपलब्ध हो जाती है. उन्होंने कहा कि न केवल दिल्ली में बल्कि पूरे उत्तर भारत में बच्चे इस खतरे के शिकंजे में आ रहे हैं.

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रेड्डी के अनुसार चिंताजनक बात यह भी है कि नशीली दवाओं के आदी लोगों में से 83 फीसदी लोग शिक्षित हैं. ड्रग माफिया का जाल ऐसा है कि राज्य सरकारें इस समस्या को नियंत्रित नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कहा कि इस समस्या पर हाल ही में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने एक बैठक की थी जिसमें एक साझा सूचना तंत्र बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया.
रेड्डी ने कहा कि पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे देशों से तस्करी कर नशीली दवाएं भारत लाई जा रही हैं.

सरकार से मांग की कि युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाली और देश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर डालने वाली नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक नीति बनाई जानी चाहिए.

रेड्डी ने कहा कि ड्रग तस्करी पर रोक के लिए नार्कोटिक्स संबंधी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय होना चाहिए तथा राष्ट्रीय जांच एजेंसी की तरह ही कोई जांच एजेंसी भी बनाई जानी चाहिए. विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे को स्वीकार किया.

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