होम /न्यूज /धर्म /Achman: क्या होता है आचमन? पूजा-अर्चना से पहले आचमन करने का क्या है लाभ

Achman: क्या होता है आचमन? पूजा-अर्चना से पहले आचमन करने का क्या है लाभ

पूजा से पहले तीन बार करें आचमन मिलेगा पूजा का दोगुना फल

पूजा से पहले तीन बार करें आचमन मिलेगा पूजा का दोगुना फल

हिंदू धर्म में आचमन को महत्वपूर्ण माना गया है. किसी भी पूजा-पाठ की शुरुआत करने से पहले आचमन जरूर करना चाहिए. मान्यता है ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

पूजा से पहले तीन बार मंत्रों के उच्चारण के साथ करना चाहिए आचमन.
पूजा से पूर्व शुद्ध जल को ग्रहण करने की प्रकिया को कहा जाता है आचमन.
आचमन करने के बाद हाथ को माथे और कान से छूकर प्रणाम करें.

Achman Importance In Puja: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ से जुड़ी कई विधियों और नियमों के बारे में बताया गया है. पूजा से पूर्व और पूजा पश्चात कई नियमों का पालन करना होता है. इन्हीं में एक होती है आचमन की विधि. आचमन पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. शास्त्रों में आचमन की विधि, महत्व और लाभ के बारे में बताया गया है. पूजा से पहले आचमन करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है. किसी भी पूजा-पाठ में शरीर का शुद्ध होना बहुत जरूरी होता है. शरीर को शुद्ध करने की इसी प्रक्रिया को आचमन कहा जाता है. आचमन का स्पष्ट अर्थ होता है पवित्र जल को पीना.

पूजा से पूर्व शुद्धि के लिए मंत्रोच्चारण के साथ शुद्ध जल को ग्रहण किया जाता है. शुद्ध जल को ग्रहण करने की यह प्रकिया ही आचमन कहलाती है. दिल्ली के आचार्य गुरमीत सिंह जी से जानते हैं आचमन की विधि और महत्व के बारे में.

इस विधि से करें आचमन
पूजा शुरू करने से पहले पूजा से संबंधित सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें. साथ ही एक तांबे के पात्र में गंगाजल या शुद्ध जल भरकर रखें. इसमें तुलसी दल भी डालें. तांबे के पात्र में एक तांबे की आचमनी (एक छोटा सा चम्मच, जिससे जल निकाला जाता है) भी रखें. पूजा शुरू करने से पहले भगवान का ध्यान करते हुए आचमनी से जल निकालकर हथेली पर रखें और ग्रहण करें. इस प्रकिया को तीन बार करें.

ये भी पढ़ें:  कन्या और मिथुन राशि के स्वामी हैं बुध, इस रत्न को धारण करने से होगा फायदा

ये भी पढ़ें: इस फूल को घर में पैसों के स्थान पर रखें, नहीं होगी कभी धन की कमी

आचमन के लिए मंत्र
आचमन के लिए शुद्ध जल ग्रहण करते समय मंत्रोच्चारण करना जरूरी होता है. आचमन करते समय ‘ॐ केशवाय नम: ॐ नाराणाय नम: ॐ माधवाय नम: ॐ ह्रषीकेशाय नम:’ मंत्र का उच्चारण जरूर करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आचमन करने के बाद हाथ को माथे और कान से छूकर प्रणाम करें.

मंत्रोच्चारण के साथ लगातार तीन बार आचमन करने से पूजा में मन, वचन और कर्म तीनों की शुद्धता बनी रहती है और पूजा से भगवान प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.

आचमन करते समय दिशा का रखें ध्यान
पूजा-पाठ की विधियों में दिशा का विशेष महत्व होता है क्योंकि गलत दिशा में की गई पूजा से इसका फल प्राप्त नहीं होता. आचमन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपका मुख पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की तरफ रहे.

Tags: Dharma Aastha, Religious

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें