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अधिक मास 2020: श्रीहरि की करें पूजा, जानें इस माह में क्या खाएं और क्या नहीं

मान्यता है कि अधिक मास में एक समय ही भोजन करना चाहिए जो कि आध्यात्मिक और सेहत की दृष्टि से उत्तम होता है.
मान्यता है कि अधिक मास में एक समय ही भोजन करना चाहिए जो कि आध्यात्मिक और सेहत की दृष्टि से उत्तम होता है.

अधिक मास (Adhik Maas 2020) में कुछ खास नियम भी बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का आर्शाीवाद प्राप्त होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 8:01 AM IST
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हर वर्ष पितृ पक्ष (Pitru Paksha) की समाप्ति के बाद नवरात्रि अश्‍विन माह में ही प्रारंभ होती है लेकिन इस बार अश्विन मास में पुरुषोत्तम अर्थात अधिक मास लगने के कारण एक महीने के अंतर पर नवरात्रि आरंभ होगी. ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद होने जा रहा है. आश्विन महीने में अधिमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक रहेगा. अधिकमास को मलमास, खरमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. मलमास में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है. लोग इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवतभक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग जैसे धार्मिक कार्यों में संलग्न रहते हैं. ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है.

यही वजह है कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान (God) को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं. यह माह बहुत ही प्रभावशाली और पवित्र है लेकिन यह हर तीन साल में आता है. अधिक मास में कुछ खास नियम भी बताए गए हैं. इन नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु का आर्शाीवाद प्राप्त होता है. आइए आपको बताते हैं कि इस मास में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं.

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क्या खाएं-
-इस माह में जप और तप के अलावा व्रत का भी महत्व है. मान्यता है कि पूरे मास एक समय ही भोजन करना चाहिए जो कि आध्यात्मिक और सेहत की दृष्टि से उत्तम होता है.

-भोजन में गेहूं, चावल, जौ, मटर, मूंग, तिल, बथुआ, चौलाई, ककड़ी, केला, आंवला, दूध, दही, घी, आम, हर्रे (हरड़), पीपल, जीरा, सौंठ, सेंधा नमक, इमली, पान-सुपारी, कटहल, शहतूत, मैथी आदि खाने का विधान है.

क्या न खाएं

-इस पुरुषोत्तम माह में किसी भी प्रकार का व्यसन न करें और मांसाहार से दूर रहें. पुरुषोत्तम मास में इन चीजों का खान-पान वर्जित है.

-वहीं फूल गोभी, पत्ता गोभी, शहद, चावल का मांड़, उड़द, राईं, मसूर, मूली, प्याज, लहसुन, बैंगन, चना, बासी अन्न, नशीले पदार्थ आदि नहीं खाने चाहिए.

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अधिक मास के स्वामी हैं भगवान विष्णु
अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं. पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है. इसीलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. इस विषय में एक बड़ी ही रोचक कथा पुराणों में पढ़ने को मिलती है. कहा जाता है कि भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए. हालांकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ, तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए. ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने ऊपर लें. भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मल मास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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