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Adhik Maas Purnima Vrat: अधिक मास पूर्णिमा व्रत का जानें शुभ मुहूर्त, पढ़ें व्रत कथा

अधिक मास पूर्णिमा व्रत की व्रत कथा पढ़ें
अधिक मास पूर्णिमा व्रत की व्रत कथा पढ़ें

अधिक मास पूर्णिमा ( Adhik Maas Purnima Vrat): इस व्रत में धन की देवी मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा का प्रावधान है. अधिक मास पूर्णिमा में जरूरतमंदों को दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 7:01 AM IST
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अधिक मास पूर्णिमा ( Adhik Maas Purnima Vrat): आज 1 अक्टूबर को अधिक मास की पूर्णिमा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत में धन की देवी मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा का प्रावधान है. अधिक मास पूर्णिमा में जरूरतमंदों को दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. भक्त आज सुबह से ही व्रत हैं और मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा कर रहे हैं. आइए जानते हैं अधिक मास पूर्णिमा व्रत का शुभ मुहूर्त और व्रत कथा...

अधिक मास पूर्णिमा मुहूर्त ( Adhik Maas Purnima subh muhurat)
अधिक मास पूर्णिमा मुहूर्त- 30 सितंबर दिन बुधवार को देर रात में 12 बजकर 25 मिनट है.
अधिक मास पूर्णिमा का समापन- 01 अक्टूबर रात 02 बजकर 34 मिनट .
अधिक मास पूर्णिमा व्रत कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कांतिका नगर में धनेश्वर नाम का ब्राह्मण निवास करता था जो दान पर अपना जीवन निर्वाह करता था. ब्राह्मण और उसकी पत्नी के कोई संतान नही थी. एक दिन उसकी पत्नी नगर में भिक्षा मांगने गई. लेकिन सबने उसे भिक्षा देने से इनकार कर दिया.



कई लोगों ने बांझ कहकर उसका अपमान किया. तब एक व्यक्ति ने उसे 16 दिन तक मां काली की पूजा करने को कहा. ब्राह्मण दंपत्ति ने ऐसा ही किया और 16 दिन बाद मां काली स्वयं प्रकट हुईं.

मां काली ने ब्रह्मण की पत्नी को गर्भवती होने का वरदान दिया और कहा कि अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम दीपक जलाओ. हर पूर्णिमा को तुम 1 दीपक बढ़ा देना. इस तरह कर्क पूर्णिमा के दिन तक कम से कम 22 दीपक जलाना.

ब्राह्मण ने पत्नी को पूजा के लिए पेड़ से आम का कच्चा फल तोड़कर दिया. उसकी पत्नी ने पूजा की और गर्भवती हुई. प्रत्येक पूर्णिमा को वह मां काली के कहे अनुसार दीपक जलाती रही. मां काली की कृपा से उनके घर एक पुत्र ने जन्म लिया जिसका नाम देवदास रखा गया.

बड़ा होने पर उसे अपने मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा गया. काशी में उन दोनों के साथ एक दुर्घटना घटी जिसके कारण धोखे से देवदास का विवाह हो गया. देवदास ने कहा कि वह अल्पायु है लेकिन उसके बावजूद भी जबरन उसका विवाह करवा दिया गया.

कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया लेकिन ब्राह्मण दंपत्ति ने पूर्णिमा का व्रत रखा था इसलिए काल उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाया. इस कथा के अनुसार सच्चे मन से पूर्णिमा के दिन व्रत करने से संकट से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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