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Agni Panchak Today: 'चोर' से लेकर 'रोग' तक जानें कितने प्रकार के होते हैं 'पंचक', क्‍या होता है इनका असर?

नक्षत्रों के विशेष योग से आज शाम 7.51 बजे से अग्नि पंचक लग रहा है.

नक्षत्रों के विशेष योग से आज शाम 7.51 बजे से अग्नि पंचक लग रहा है.

Agni Panchak Today - सभी पंचक अशुभ फल देने वाले नहीं होते हैं. दूसरे शब्‍दों में कहें तो कुछ पंचक ऐसे भी होते हैं, जिनम ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. हिंदुओं की धार्मिक मान्‍यता में कोई भी मांगलिक कार्य करने से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है. इसमें ग्रहों और नक्षत्रों की अंतरिक्ष में स्थिति को देखकर गणना की जाती है. इसके बाद मांगलिक कार्य के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित किया जाता है. माना जाता है कि इस तरह से किसी शुभ कार्य की शुरुआत करने पर सफलता की संभावनाएं बहुत ज्‍यादा बढ़ जाती हैं. इसके उलट मान्‍यता है कि अगर अशुभ मुहूर्त में कोई नया कार्य प्रारंभ करते हैं तो कई तरह की समस्‍याएं पैदा होने के आसार बढ़ जाते हैं.

मंगलवार यानी 29 नवंबर 2022 की शाम 7 बजकर 51 मिनट से नक्षत्रों का ऐसा ही योग बन रहा है, जिसे पंचक कहा जाता है. ऐसे में अगले 5 दिन तक कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य शुरू नहीं करने की सलाह दी जाती है. आज शाम 7.51 बजे से ‘अग्नि पंचक’ लग रहा है. साफ है कि पंचक भी कई तरह के होते हैं. आइए जानते हैं कि ‘पंचक’ कितने प्रकार के होते हैं और इनका असर क्‍या होता है? साथ ही जानते हैं कि किन ग्रहों या नक्षत्रों के योग से पंचक लगता है.

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कब और कैसे लगता है ‘पंचक’
धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, रेवती और शतभिषा नक्षत्र पर जब चंद्रमा गोचर करता है, तब पंचक काल लगता है. देश के कुछ हिस्‍सों में इसे ‘भदवा’ भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पंचक तभी लगता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि पर गोचर करता है. ‘पंचक’ का सीधा संबंध शुरुआत के दिन से होता है. इसी के आधार पर उसका नाम तय किया गया है. अब जान लेते हैं कि चोर से लेकर रोग तक पंचक कितने प्रकार के होते हैं?

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पंचक तभी लगता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि पर गोचर करता है.

मंगलवार को लगे तो ‘अग्नि पंचक’
सबसे पहले आज शाम से लगने वाले पंचक के बारे में जान लेते हैं. दरअसल अगर ‘पंचक’ मंगलवार को शुरू हो तो उसे ‘अग्नि पंचक’ कहा जाता है. इन 5 दिन में कोर्ट कचहरी और विवाद के फैसलों पर अपना अधिकार हासिल करने वाले काम किए जा सकते हैं. मान्यता है कि अग्नि पंचक में निर्माण कार्य या मशीनरी से जुड़े काम शुरू करने को अशुभ माना जाता है.

‘अग्नि पंचक’ में मंगल ग्रह से जुड़ी चीजों का इस्‍तेमाल काफी सावधानी से करना चाहिए. साथ ही इस दौरान आग से बचना चाहिए. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट कहते हैं कि जब से अग्नि पंचक शुरू हो, तब से नए गैस स्‍टोव का इस्‍तेमाल शुरू नहीं करना चाहिए. इसके अलावा इस समय में हवन और यज्ञ भी करना ​वर्जित रहता है.

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बुधवार को शुरू हुआ ‘पंचक’ तो?
सभी पंचक अशुभ फल देने वाले नहीं होते हैं. दूसरे शब्‍दों में कहें तो कुछ पंचक ऐसे भी होते हैं, जिनमें शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित नहीं होते हैं. मान्‍यता है कि बुधवार और बृहस्‍पतिवार को शुरू होने वाले पंचक में सभी तरह के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. इनके 5 दिनों में सगाई, विवाह जैसे मांगलिक कार्य भी किए जा सकते हैं.

शुक्रवार को लगे तो ‘चोर पंचक’
ज्‍योतिष शाज्ञत्र के मुताबिक, शुक्रवार को लगने वाला ‘चोर पंचक’ कहा जाता है. मान्‍यता है कि चोर पंचक में पैसों या प्रॉपर्टी के लेनदेन और कारोबार शुरू करने से बचना चाहिए.

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पंचक अगर बुधवार और बृहस्‍पतिवार से शुरू हो तो शादी-ब्‍याह जैसे मांगलिक कार्य कर सकते हैं.

‘मृत्यु पंचक’ शनिवार से होता है शुरू
पंचकों में ‘मृत्‍यु पंचक’ में सबसे ज्‍यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. शनिवार से प्रारंभ होने वाला ‘मृत्यु पंचक’ कहलाता है. ज्‍योतिष शास्‍त्र सलाह देता है कि ‘मृत्‍यु पंचक’ के दौरान क्रोध से बचना और वाणी में मिठास लानी चाहिए.

रविवार को लगे तो है ‘रोग पंचक’
जिस पंचक में किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करने की सलाह दी जाती है, उनमें रविवार को शुरू होने वाला ‘रोग पंचक’ है. इस दौरान 5 दिन शारीरिक और मानसिक समस्‍याएं पैदा हो सकती हैं. हर तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए ये पंचक अशुभ माना जाता है.

‘राज पंचक’ भी होता है शुभ फालदायी
शुभ पंचकों में सोमवार को शुरू होने वाला ‘राज पंचक’ भी शामिल है. ज्‍योतिष शास्‍त्र के मुताबिक, इसके प्रभाव से 5 दिन में सरकार या सरकारी दफ्तरों से जुड़े कामों में सफलता मिलन की संभावना काफी बढ़ जाती है. यही नहीं, संपत्ति से जुड़े काम करेंगे तो भी सफपलता मिल सकती है.

**(Disclaimer: लेख में दी गईं सभी जानकारियां सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. News18हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Dharma Culture, Religion

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