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Ahoi Ashtami: इस तारीख को है अहोई अष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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Updated: October 20, 2019, 4:49 AM IST
Ahoi Ashtami: इस तारीख को है अहोई अष्टमी, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
इस तारीख को है अहोई अष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त

Ahoi Ashtami: आइए जानते हैं क्या है इस बार अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त और क्या है इसका धार्मिक महत्व...

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  • Last Updated: October 20, 2019, 4:49 AM IST
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अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami): अहोई अष्टमी इस बार 21 अक्टूबर को है. हर साल यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु, प्रगति और स्वस्थ जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं. महिलाएं इस दिन मां पार्वती के ही एक रूप अहोई माता की पूजा अर्चना करती हैं. मान्यता है कि व्रत को रखने से निःसंतान लोगों को विशेष फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं क्या है इस बार अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त और क्या है इसका धार्मिक महत्व...

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) पूजा का शुभ मुहूर्त:
अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) का व्रत 21 अक्‍टूबर 2019 को शाम 5 बजकर 42 मिनट से शुरू हो जाएगा और जो शाम 06 बजकर 59 मिनट तक चलेगा.
तिथि का समापन: 22 नवंबर 2019 को सुबह 05 बजकर 25 मिनट तक अहोई अष्टमी का समापन हो जाएगा.

पूजा का मुहूर्त: 21 अक्‍टूबर 2019 को शाम 05 बजकर 42 मिनट से शाम 06 बजकर 59 मिनट तक
तारों को देखने का समय: 21 अक्‍टूबर 2019 को शाम 06 बजकर 10 मिनट
चाँद उदय होने का समय: 21 अक्‍टूबर 2019 को रात 11 बजकर 46 मिनट तक चंद्रोदय होगा.
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अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) पूजा विधि:

  1. अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) की पूजा करने के लिए सबसे पहले गाय के गोबर से दीवार पर कठपुतली बनाएं. इसके बाद ऐसे ही उनके बच्चों को बनाएं. शाम के समय प्रदोष काल में पूरे विधि विधान के साथ अहोई माता की पूजा अर्चना करें.


2. अहोई माता की पूजा करने से पहले स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें. इसके बाद कुश के आसन पर बैठकर व्रत का संकल्प पढ़ें. दीवार पर गोबर, गेरू या चावल से अहोई माता की तस्वीर बनाएं. आप चाहें तो मार्केट से भी अहोई माता का कैलेंडर खरीद सकते हैं.

3. इसके बाद मां के सामने चावल से भरा कटोरा, मूली, सिंघाड़े दिया और पीतल या तांबे के लोटे में पानी रखें. पानी को करवा से ढंक दें. करवा चौथ में इस्तेमाल किया हुआ करवा ही प्रयोग में लाएं. दिवाली के दिन इसी करवे के पानी से पूरे घर का पवित्रीकरण करें. अहोई अष्टमी की कथा और आरती का पाठ करें.

4. शाम को प्रदोष काल में दीवार पर बनी अहोई माता को 14 पूरियों, आठ पुओं और खीर का प्रसाद चढ़ाएं. इसके बाद अहोई व्रत कथा पढ़ें. लोटे में चावल डालकर इससे तारों को अर्घ्य दें. प्रसाद को घर की सबसे बड़ी महिला को दें.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: October 20, 2019, 4:47 AM IST
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