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Ahoi Ashtami 2022: कब है अहोई अष्टमी व्रत? जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत उत्तर भारत में विशेष तौर पर रखा जाता है.

अहोई अष्टमी का व्रत उत्तर भारत में विशेष तौर पर रखा जाता है.

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. आइए जानते हैं अहोई अ ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ व्रत के चौथे दिन होता है.
अहोई अष्टमी का व्रत उत्तर भारत में विशेष तौर पर रखा जाता है.
इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) का व्रत करवा चौथ व्रत के चौथे दिन या दिवाली से आठ दिन पूर्व होता है. हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है और चतुर्थी को करवा चौथ व्रत होता है. अहोई अष्टमी का व्रत उत्तर भारत में विशेष तौर पर रखा जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी बता रहे हैं अहोई अष्टमी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व के बारे में.

अहोई अष्टमी 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर दिन सोमवार को सुबह 09 बजकर 29 मिनट से प्रारंभ हो रही है. यह तिथि 18 अक्टूबर दिन मंगलवार को सुबह 11 बजकर 57 मिनट तक मान्य है. अहोई अष्टमी के व्रत में तारों को देखने और चंद्रमा को जल अर्पित करने का महत्व है. अष्टमी तिथि में यह 17 अक्टूबर को होगा, इसलिए अहोई अष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा.

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अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2022
17 अक्टूबर को अहोई अष्टमी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 05 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ हो रहा है, जो शाम 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. ऐसे में आप पूजा सामग्री का पहले से ही प्रबंध कर लें. अहोई अष्टमी की पूजा में शाम के समय तारों को देखने के बाद व्रत खोला जाता है. कई स्थानों पर माताएं चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद ही पारण करती हैं.

अहोई अष्टमी 2022 चंद्रोदय और तारों को देखने का समय
अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखने के लिये साँझ का समय शाम 06 बजकर 13 मिनट सक शुरु हो रहा है. जो माताएं चंद्रमा को देखकर व्रत खोलेंगी, उनको देर रात तक इंतजार कर ना होगा क्योंकि कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय काफी देर से होता है. अहोई अष्टमी की रात चंद्रोदय 11 बजकर 24 ​मिनट पर होगा.

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शिव और सिद्ध योग में अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी के दिन शिव और सिद्ध योग बना हुआ है. शिव योग प्रात:काल से लेकर शाम 04 बजकर 02 मिनट तक है. उसके बाद से सिद्ध योग प्रारंभ हो जाएगा. सिद्ध योग में पूजा पाठ और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

अहोई अष्टमी की तिथि में सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना हुआ है. यह 18 अक्टूबर को प्रात: 05 बजकर 13 मिनट से प्रात: 06 बजकर 23 मिनट तक है.

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुरक्षा और उसके सुखी जीवन की कामना के लिए रखा जाता है. इस दिन अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनते हैं. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से संतान सेहतमंद और सुखी रहती है.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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