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जानें कब है अहोई अष्टमी, यहां पढ़ें व्रत कथा

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Updated: October 19, 2019, 8:22 AM IST
जानें कब है अहोई अष्टमी, यहां पढ़ें व्रत कथा
अहोई अष्टमी का व्रत

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2019): शाम को पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ने का प्रावधान है. शाम को पूजा के बाद जब आसमान में तारे दिखाई देते हैं तब महिलाएं ये व्रत खोलती हैं. आइए पढ़ते हैं अहोई अष्टमी की व्रत कथा...

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अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2019): कार्तिक माह की शुरुआत ही व्रत और त्योहारों के साथ हुई है. इस माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को महिलाएं अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2019) का व्रत रखती हैं. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक़, महिलाएं संतान की प्रगति और स्वस्थ जीवन की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं. मां पार्वती का ही एक रूप माता अहोई है. यही वजह है कि इस दिन महिलाएं मां अहोई की पूजा करती हैं. अहोई का मतलब है किसी अशुभ घटना को शुभ में बदल देने वाला. इस बार अहोई अष्टमी 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है. शाम को पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ने का प्रावधान है. शाम को पूजा के बाद जब आसमान में तारे दिखाई देते हैं तब महिलाएं ये व्रत खोलती हैं. आइए पढ़ते हैं अहोई अष्टमी की व्रत कथा...

व्रत कथा:

पुराने समय में एक शहर में एक साहूकार के 7 लड़के रहते थे. साहूकार की पत्नी दिवाली पर घर लीपने के लिए अष्टमी के दिन मिटटी लेने गई. जैसे ही उसने कुदाल चलायी वो सेह की मांद में जा लगी, जिससे कि सेह का बच्चा मर गया. साहूकार की पत्नी को इसे लेकर काफी पश्चाताप हुआ. इसके कुछ दिन बाद ही उसके एक बेटे की मौत हो गई, इसके बाद एक-एक करके उसके सातों बेटों की मौत हो गई. इस कारण साहूकार की पत्नी शोकाकुल रहने लगी. उसने अपनी पड़ोसी औरतों को रोते हुए अपना दुःख कह सुनाया. जिसपर औरतों ने उसे सलाह दी कि यह बात साझा करने से तुम्हारा आधा पाप कट गया है.

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अब तुम अष्टमी के दिन सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाकर मां भगवती की पूजा करो और क्षमा याचना करो. भगवान की कृपा हुई त तुम्हारे पाप कट जाएंगे. ऐसा सुनकर साहूकार की पत्नी हर साल कार्तिक मास की अष्टमी को मां अहोई की पूजा व व्रत करने लगी. कई साल बाद उसके सात बेटे हुए. तभी से अहोई अष्टमी का व्रत चला आ रहा है.

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इस व्रत कथा से हमें इस बात की प्रेरणा मिलती है कि हमें जीव-जंतुओं के प्रति दया भाव रखना चाहिए और अहिंसा के रास्ते पर चलना चाहिए. ऐसा भी माना जाता है कि यदि इस दिन संतान सुख से वंचित लोग गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले राधाकुंड में स्नान करते हैं तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है.

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First published: October 19, 2019, 5:17 AM IST
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