लाइव टीवी

अक्षय आंवला नवमी: पढ़ें व्रत कथा, इसके बिना अधूरी है आपकी पूजा

News18Hindi
Updated: November 5, 2019, 4:49 AM IST
अक्षय आंवला नवमी: पढ़ें व्रत कथा, इसके बिना अधूरी है आपकी पूजा
आंवला नवमी कथा

आंवले के पेड़ की पूजन व वृत के कारण ही महिला को कुछ दिनों बाद संतान की प्राप्ति हुई. तब से ही हिंदू धर्म में इस वृत का प्रचलन बढ़ा और परंपरा शुरू हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2019, 4:49 AM IST
  • Share this:
हिंदू धर्म में आंवला नवमी का विशेष महत्व है. इस बार आंवला नवमी 5 नवंबर को है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी पर भगवान विष्णु की पूजा करना काफी शुभ फलदायक मानी जाती है. इसी तिथि को आंवला नवमी कहते हैं. मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ करने से कई जन्मों तक अच्छे फल की प्राप्ति होती है. ऐसा माना जाता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला पैदा हुआ था इसलिए इसे आंवला नवमी की भी संज्ञा दी जाती है.

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, नवमी के दिन आंवले की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु, शिव और मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु को दो वक्त-सुबह और शाम आंवला अर्पित करना चाहिए.
आइए जानते हैं आंवला नवमी की पर भगवान को खुश करने के लिए किस तरह करें पूजा...

इसे भी पढ़ेंः Chhath Puja 2019: इन चीजों के बिना अधूरी है छठ पूजा, देखें पूजा सामग्री की लिस्ट

आंवला नवमी की कथा
काशी नगर में एक निःसंतान धर्मात्मा वैश्य रहता था. एक दिन वैश्य की पत्नी से एक पड़ोसन बोली यदि तुम किसी दूसरी स्त्री के लड़के की बलि भैरवजी को चढ़ा दो तो तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी. इस बात का पता वैश्य को चला तो उसने इसे अस्वीकार कर दिया . लेकिन उसकी पत्नी नहीं मानी. एक दिन उसने एक कन्या को कुएं में गिराकर भैरव जी को उसकी बलि दे दी, इस हत्या का परिणाम विपरीत हुआ.

वैश्य की पत्नी के शरीर में कोढ़ हो गया और लड़की की आत्मा उसे परेशान करने लगी. वैश्य के पूछने पर उसने पति को सारी बातें बता दी. वैश्य ने पत्नी से कहा ब्राह्मण वध,बाल वध व गौ हत्या पाप है, ऐसा करने वालों के लिए इस धरती में कोई जगह नहीं है. वैश्य की पत्नी अपने किये पर शर्मसार होने लगी, तब वैश्य ने उससे कहा कि तुम गंगाजी की शरण में जाकर भगवान का भजन करो व गंगा स्नान करो तभी तुम्हें इस रोग से मुक्ति मिल पाएगी. वैश्य की पत्नी गंगाजी की शरण में जाकर भगवान  का भजन करने लगी, गंगाजी ने उसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवले के पेड़ की पूजा करने की सलाह दी थी. गंगाजी की सलाह पर महिला ने इस तिथि पर आंवले के पेड़ की पूजा करके आंवला खाया था, जिससे वह रोगमुक्त हो गई थी.
Loading...

आंवले के पेड़ की पूजन व वृत के कारण ही महिला को कुछ दिनों बाद संतान की प्राप्ति हुई. तब से ही हिंदू धर्म में इस वृत का प्रचलन बढ़ा और परंपरा शुरू हो गई.

इसे भी पढ़ेंः Chhath Puja 2019: क्यों मनाया जाता है छठ, क्या है इसके पीछे का इतिहास?

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए कल्चर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 5, 2019, 4:49 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...