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आज अक्षय तृतीया पर पढ़ें यह कथा, जानें अगले जन्म में कैसे बनता है राजयोग

भविष्य पुराण में अक्षय तृतीया की कथा के बारे में बताया गया है.

भविष्य पुराण में अक्षय तृतीया की कथा के बारे में बताया गया है.

इस वर्ष अक्षय तृतीया आज 03 मई दिन मंगलवार को है. इस दिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. जानते हैं भविष्य पुराण में दी गई अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) की कथा के बारे में.

इस वर्ष अक्षय तृतीया आज 03 मई दिन मंगलवार को है. इस दिन वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. इस दिन किए गए पुण्य कर्म का फल अक्षय होता है. उस फल का नाश नहीं होता है, इसलिए अक्षय तृतीया को सिर्फ अच्छे कर्म करने को कहते हैं. इस दिन किए गए बुरे कार्यों का बुरा फल भी अक्षय रहता है, जो अगले जन्म में भोगना पड़ता है. अक्षय तृतीया के अवसर पर किए गए दान पुण्य से मिलने वाला अक्षय फल आपको अगले जन्म में राजयोग भी दिला सकता है, ठीक वैसे ही जैसे एक वैश्य अपने अगले जन्म में राजयोग से राजा बन गया. पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं भविष्य पुराण में दी गई अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) की कथा के बारे में.

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अक्षय तृतीया की कथा

एक समय की बात है. शाकलनगर में धर्मदास नामक वैश्य रहता था. वह धार्मिक विचारों वाला व्यक्ति था. वह कभी भी पूजा पाठ और दान पुण्य के अवसरों को अपने हाथ से जाने नहीं देता था. भगवान की भक्ति में उसकी आस्था थी. वह ब्राह्मणों का आदर-सत्कार करता था.

एक दिन किसी के जरिए उसे अक्षय तृतीया के महत्व के बारे में पता चला. उसने धर्मदास को बताया कि अक्षय तृतीया को पूजा पाठ करने और ब्रह्मणों को दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. यह बात उसके मन में बैठ गई.

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जब वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आई, तो उसने सुबह नदी स्नान किया. उसके पश्चात अपने पितरों की पूजा की, फिर घर पहुंचकर देवी देवताओं की पूजा अर्चना की. उसके ब्राह्मणों को बुलाकर उनका सम्मान​ किया और दही, गुड़, घी, अनाज, गेहूं, चना, सोना आदि दानकर खुशीपूर्वक विदा किया.

इस तरह से वह हर साल अक्षय तृतीया पर पूजा पाठ और दान करने लगा. हालांकि उसके घरवालों को यह बात ठीक नहीं लगती थी, उसकी पत्नी ने उसे ऐसा करने से मना भी किया, लेकिन उसने दान पुण्य करना नहीं छोड़ा.

कुछ समय के बाद धर्मदास का निधन हो गया. फिर अगले जन्म में वह द्वारका के कुशावती में पैदा हुआ. वह वहां का राजा बना. यह अक्षय तृतीया के दिन किए गए पूजा पाठ एवं दान पुण्य का ही प्रभाव था. पिछले जन्म में प्राप्त अक्षय पुण्य से उसके लिए राजयोग बना. इस जन्म में भी वह धार्मिक विचारों वाला था. वह बड़ा ही वैभवशाली एवं प्रतापी राजा बना.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन इस कथा को पढ़ने या सुनने से भी अक्षय पुण्य फल प्राप्त होता है. इस दिन आपको भी य​ह कथा सुननी चाहिए.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news 18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Akshaya Tritiya, Dharma Aastha

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