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Akshaya Navami 2020 Date: आंवला नवमी कब है, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

आंवला नवमी लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को समर्पित है (फोटो साभार: instagram/aapno_jodhpur)
आंवला नवमी लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को समर्पित है (फोटो साभार: instagram/aapno_jodhpur)

Akshaya Navami 2020 Date: आंवला नवमी/अक्षय नवमी (Amla Navami 2020 ) को ही द्वापर युग ( Dwapara Yuga) का प्रारंभ होता है. इसके युगावतार भगवान श्रीकृष्ण (Lord SriKrishna) से भी इस तिथि का संबंध है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 6:53 AM IST
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Akshaya Navami 2020: दीपावली ( Deepawali) और छठ व्रत (Chhath Vrat) पूर्ण होते ही सनातन धर्मी विशेषकर वैष्णवजन अक्षय नवमी ( Akshaya Navami) की तैयारियों में लग जाते हैं. कार्तिक मास (Karthik Month) की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ने वाले इस व्रत का हिन्दू परंपरा ( Hindu Tradition) में विशेष स्थान है. आंवला नवमी भारतीय लोकमानस में रचा-बसा एक ऐसा पर्व हैं, जो कार्तिक मास की दिव्यता और भव्यता को ऊंचाई देता है.

अक्षय नवमी 23 नवंबर को-

सबसे पावन कार्तिक मास में वैसे तो हर दिन का विशेष महत्व है, लेकिन कार्तिक शुक्ल नवमी का महात्म्य पुराण प्रसिद्ध है. कार्तिक माह की इस नवमी को अक्षय नवमी और लोकभाषा में आंवला नवमी (Amala Navami) भी कहते हैं. आचार्य डॉ. भारतभूषण पांडेय के मुताबिक- अक्षय नवमी इस वर्ष 23 नवंबर, 2020 ( 23 November,2020) को है. नवमी तिथि 22 नवंबर (Sunday) की रात 10:52 बजे से आरंभ होकर 23 नवंबर सोमवार (Monday) रात्रि 12: 33 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 06: 45 बजे से 11:54 तक रहेगा, यानि पूजा का कुल समय 5 घंटे 08 मिनट है.



कैसे होती है पूजा-
इस दिन आंवला ( Gooseberry) वृक्ष के नीचे भोजन पकाने, खाने और गुप्तदान की सदियों पुरानी परंपरा है, जिसका निर्वहन ग्रामीण भारत की महिलाएं पूरी नेम-निष्ठा से करती हैं. कई अन्य पर्वों की तरह यह व्रत भी महिलाओं द्वारा संपादित होता है. वे प्रातःकाल उठकर स्नान-ध्यान से निवृत होकर आंवले के वृक्ष के नीचे पहुंचती हैं, आंवले की विधि पूर्वक पूजा करती हैं. सामूहिक रुप से आंवले के पेड़ में धागा (कच्चा सुता) लपेटती हैं और फिर वहीं खाना पकाकर परिजनों और संगे-संबंधियों के साथ खाती हैं. मान्यता है कि इस दिन किया जाने वाला गुप्त दान बहुत फलदायी होता है.

आंवला नवमी की पौराणिकता-

शास्त्रकारों के अनुसार अक्षय नवमी को ही द्वापर युग ( Dwapara Yuga) का प्रारंभ होता है. इसके युगावतार भगवान श्रीकृष्ण (Lord SriKrishna) से भी इस तिथि का संबंध है. कहते हैं कि शुक्ल पक्ष की आंवला नवमी के दिन ही श्रीकृष्ण ने वृंदावन से मथुरा ( Vrindavan to Mathura) प्रस्थान किया था. एक और कथा है कि कंस (Kans) को मारने से पहले श्रीकृष्ण ने इसी दिन ब्रजभूमि (Brij Bhoomi) के तीन वनों (पर्वतों) की परिक्रमा की थी, आज भी लाखों श्रद्धालु इस परंपरा को मानते हुए ब्रजभूमि की परिक्रमा करते हैं. ब्रजभूमि का परिक्रमा मार्ग इसकी पुष्टि करता है. अयोध्या ( Ayodhya) की ऐतिहासिक चौदह कोसी परिक्रमा भी अक्षय नवमी से आरंभ होती है, जो 24 घंटे की होती है. लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते और परिक्रमा में भाग लेते हैं. शास्त्रों में भगवान विष्णु (Lord Vishnu) द्वारा कुष्माण्डक (Kushmandak) नामक दानव ( Demon) के इसी तिथि को वध किये जाने की चर्चा मिलती है.  (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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