Anant Chaturdashi 2020: आज मनाई जा रही है अनंत चतुर्दशी, जानें अनंत सूत्र में क्यों बांधी जाती हैं 14 गांठें

Anant Chaturdashi 2020: आज मनाई जा रही है अनंत चतुर्दशी, जानें अनंत सूत्र में क्यों बांधी जाती हैं 14 गांठें
इस पूजा में भगवान विष्णु के साथ अनंत सूत्र की भी पूजा की जाती है. इसके बाद उसे हाथ में धारण किया जाता है.

अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2020) पर अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है तो वहीं अनंत सूत्र (Anant Sutra) में लगी 14 गांठें भगवान विष्णु (Lord Vishnu) द्वारा बनाए गए 14 लोकों का प्रतीक होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 1, 2020, 10:48 AM IST
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भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi 2020) मनाई जाती है. यह दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को समर्पित है. साथ ही इस दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है. कई जगहों पर इसे अनंत चौदस भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है. इस पूजा में भगवान विष्णु के साथ अनंत सूत्र (Anant Sutra) की भी पूजा की जाती है. इसके बाद उसे हाथ में धारण किया जाता है. इस अनंत सूत्र में 14 गांठे लगी होती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनंत सूत्र क्या होता है और इसमें ये 14 गांठे क्यों लगाते हैं. आइए आपको बताते हैं इसके बारे में सबकुछ.

अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद एक चौकी पर कलश की स्थापना की जाती है और उस पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा रखी जाती है. साथ ही एक सूती धागे को कुमकुम, हल्दी और केसर से रंगा जाता है. इस धागे में14 गांठे लगाई जाती हैं. इसे ही अनंत सूत्र कहा जाता है. इस धागे को भगवान विष्णु की तस्वीर के समक्ष रखकर पूजा करते हुए मंत्र पढ़े जाते हैं. पूजा के बाद इस अनंत सूत्र को हाथ में धारण किया जाता है.

अनंत चतुर्दशी पर अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है तो वहीं अनंत सूत्र में लगी 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा बनाए गए 14 लोकों का प्रतीक होती हैं. माना जाता है कि यह सूत्र हर संकट से मनुष्य की रक्षा करता है. यदि हरि अनंत हैं, तो 14 गांठें हरि द्वारा उत्पन्न 14 लोकों की प्रतीक हैं. माना जाता है कि विष्णु जी ने सृष्टि के आरंभ में 14 लोकों की रचना की थी जिनके नाम इस प्रकार हैं- तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य और मह.



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कहा जाता है कि इन चौदह लोकों का पालन करने के लिए विष्णु जी ने भी चौदह अवतार लिए थे जिसके कारण वे अनंत प्रतीत होने लगे थे. अनंत चतुर्दशी के दिन श्री कृष्ण द्वारा पांडवों को सुनाई गई कौंडिण्य ऋषि की कथा भी पढ़ी और सुनी जाती है. इस व्रत को चौदह वर्षों तक करने से मनुष्य को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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