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Apara Ekadashi 2021: कल है अपरा एकादशी, यहां देखें पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

अपरा एकादशी का मतलब है अपार पुण्य

Apara Ekadashi 2021: स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) ने युधिष्ठिर को अपरा एकादशी व्रत की महिमा का बखान किया था. श्रीकृष्ण ने बताया था कि यह व्रत करने वाले जातक संसार में प्रसिद्ध होते हैं और उनके पास अथाह धन-वैभव होता है.

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    Apara Ekadashi 2021: अपरा एकादशी कल यानी कि 6 जून रविवार को है. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत की काफी महिमा है. एकादशी व्रत की तैयारियां एक रात पहले ही शुरू हो जाती हैं. अपरा एकादशी के लिए भक्त आज रात से ही खानपान में संयम बरतेंगे और कल भगवान विष्णु की पूजा (Lord Vishnu Worship) और व्रत के संकल्प के साथ अपरा एकादशी व्रत की शुरुआत करेंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत करने वाले जातकों के जीवन में पापों और कष्टों का नाश होता है. ऐसे जातक जातक सुखों को भोगते हुए ईश्वर को प्राप्त होता है. अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) ने युधिष्ठिर को अपरा एकादशी व्रत की महिमा का बखान किया था. श्रीकृष्ण ने धर्मराज को बताया था कि अपरा एकादशी व्रत करने वाले जातक संसार में प्रसिद्ध होते हैं और उनके पास अथाह धन-वैभव होता है. अपरा एकादशी की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए. आइए जानते हैं अपरा एकादशी की पूजा सामग्री की लिस्ट...

    अपरा एकादशी पूजा सामग्री की लिस्ट:
    हवनकुंड, तरह-तरह के फूल, फूलों की माला, नारियल, भगवान विष्णु की मूर्ति या फोटो, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत (बिना पके चावल) ,तुलसी दल, चंदन, रोली, कलावा और मिष्ठान.

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    अपरा एकादशी का महत्व:
    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी के दिन व्रत करने वाले जातकों को बहुत अधिक पुण्यफल की प्राप्ति होती है. अपरा एकादशी का मतलब है अपार पुण्य. यह भी मान्यता है कि जो जातक इस एकीदाशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है उसे अपार पुण्य मिलता है और उस मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में याद, धन, वैभव और निरोगी काया प्राप्त होती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
    Published by:Bhagya Shri Singh
    First published: