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Apara Ekadashi 2022: अपरा एकादशी आज, जानें तिथि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, व्रत और पूजा विधि

अपरा एकादशी व्रत के पुण्य से धन, यश, मोक्ष और प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त होती है.

अपरा एकादशी व्रत के पुण्य से धन, यश, मोक्ष और प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त होती है.

अपरा एकादशी व्रत आज है. अपरा एकादशी व्रत के पुण्य से अपार धन, यश, मोक्ष और प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं अपरा एकादशी (Apara Ekadashi) के मुहूर्त, मंत्र, कथा व्रत और पूजा विधि.

अपरा एकादशी व्रत आज है. आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. हर साल इस तिथि को अपरा एकादशी व्रत रखा जाता है. अपरा एकादशी व्रत के पुण्य से अपार धन, यश, मोक्ष और प्रेत योनि से मुक्ति प्राप्त होती है. इस दिन पालनकर्ता श्रीहरि विष्णु की पूजा विधिपूर्वक की जाती है. पूजा के समय अपरा एकादशी व्रत कथा को सुनना या पढ़ना महत्वपूर्ण होता है. इसको सुनने से भी पाप मिट जाते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं अपरा एकादशी व्रत (Apara Ekadashi) की तिथि, मुहूर्त, मंत्र, कथा व्रत और पूजा विधि के बारे में.

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अपरा एकादशी व्रत तिथि 2022
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरूआत: आज सुबह, 10:32 बजे से
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि की समाप्ति: कल सुबह, 10:54 बजे

अपरा एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त
आयुष्मान योग: सुबह से रात 10:15 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन
पूजा का समय: सूर्योदय के बाद सुबह में कभी भी

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अपरा एकादशी व्रत का पारण समय
27 मई, गुरुवार, सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:10 बजे तक

अपरा एकादशी पूजा मंत्र
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:

अपरा एकादशी व्रत एवं पूजा विधि
आज प्रात: स्नान के बाद साफ कपड़े पहन लें, फिर अपरा एकादशी व्रत और पूजा का संकल्प करें. उसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की मूर्ति पूजा स्थल पर स्थापित करें. इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं. फिर उनको वस्त्र, फूल, फल, पंचामृत, तुलसी का पत्ता, पान, सुपारी, मिठाई, धूप, दीप, गंध, चंदन आदि अर्पित करें. इस दौरान ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का उच्चारण करते रहें.

इसके पश्चात विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम और अपरा एकादशी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. इस कथा में महीध्वज नामक राजा को प्रेतात्मा से मुक्ति प्रदान करने का वर्णन मिलता है. धौम्य ऋषि उसके लिए अपरा एकादशी व्रत रखते हैं और व्रत का पुण्य उस राजा को प्रदान कर देते हैं, जिससे उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है.

कथा के बाद विधिपूर्वक भगवान विष्णु की आरती करें. फिर किसी ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें. दिनभर फलाहार पर रहें और भगवत वंदना में समय व्यतीत करें. रात्रि के समय में जागरण करे. उसके अगले दिन स्नान और पूजा के बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu

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