ज्येष्ठ पूर्णिमा पर आज है बाबा अमरनाथ यात्रा की पहली पूजा, 28 जून से ऑनलाइन दिखाई जाएगी आरती

पवित्र अमरनाथ गुफा में बना शिवलिंग.

श्री बाबा अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) की पहली पूजा ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyestha Purnima) के दिन यानी आज पवित्र गुफा स्थल पर होगी.

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    कोरोना (Corona) काल के चलते इस बार अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को रद्द कर दिया गया है. श्री बाबा अमरनाथ यात्रा की पहली पूजा ज्येष्ठ पूर्णिमा (Jyestha Purnima) के दिन यानी आज पवित्र गुफा स्थल पर होगी. यह एक पारंपरिक पूजा अर्चना होगी. साथ ही बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा से आरती का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा. इस प्रथम पूजा में श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित बोर्ड व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले सकेंगे. प्रशासन ने खुद पवित्र गुफा से आरती का सीधा प्रसारण करने की तैयारी की है. श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पवित्र गुफा स्थल पर पहुंचेंगे और प्रथम पूजा में भाग लेने के अलावा तैयारियों का जायजा भी लेंगे.

    आपको बता दें कि आरती का सीधा प्रसारण 28 जून से 22 अगस्त तक किया जाएगा. आरती श्री अमरनाथ श्राईन बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट पर प्रसारित होगी. सुबह 6 बजे से लेकर 6.30 बजे तक और शाम को 5 बजे से लेकर 5.30 बजे तक आरती का प्रसारण होगा. कोरोना के कारण लगातार दूसरे साल भी बाबा अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया गया है. हिमालय के ऊंचाई वाले हिस्से में 3,880 मीटर ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव के गुफा मंदिर के लिए 56-दिवसीय यात्रा 28 जून को पहलगाम और बालटाल मार्गों से शुरू होनी थी और यह यात्रा 22 अगस्त को समाप्त होनी थी. अमरनाथ यात्रा के लिए गत 1 अप्रैल से एडवांस पंजीकरण भी शुरू किया गया था लेकिन कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी होने के बाद पंजीकरण को बीच में ही बंद कर दिया गया.

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    बाबा अमरनाथ
    अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है. यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में समुद्र तल से 13,600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. गुफा 11 मीटर ऊंची है. अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है. प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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