Bada Mangalwar 2021: बड़ा मंगलवार कल, जानें हनुमान जी की पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व

राम भक्त हनुमान जी को, महादेव का रूद्र अवतार माना गया है.

राम भक्त हनुमान जी को, महादेव का रूद्र अवतार माना गया है.

Bada Mangalwar 2021 Shubh Muhurat Significance- राम भक्त हनुमान जी को, महादेव का रूद्र अवतार माना गया हैं. जिनकी कृपा मात्र से ही मनुष्य को जीवन के हर दुख-दर्द से मुक्ति मिल जाती है.

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Bada Mangalwar 2021 Shubh Muhurat Significance- बड़ा मंगलवार (Bada Mangalwar) कल है. बड़ा मंगलवार के मौके पर भक्त बजरंगबली की पूजा-अर्चना करेंगे. इसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है. कल मंगलवार भी है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार का दिन बजरंगबली को समर्पित माना जाता है. हर दिन हनुमान जी की आराधना के लिए उत्तम होता है, परंतु बड़ा मंगलवार का पर्व भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक शुभ माना गया है. क्योंकि यही वो पावन दिन है जब, पवन पुत्र हनुमान अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें अपना आशीर्वाद देते हैं. शास्त्रों के अनुसार श्री राम भक्त हनुमान जी को, महादेव का रूद्र अवतार माना गया हैं. जिनकी कृपा मात्र से ही मनुष्य को जीवन के हर दुख-दर्द से मुक्ति मिल जाती है.

बड़ा मंगलवार शुभ मुहूर्त:

बड़ा मंगलवार प्रारंभ- अप्रैल 6, 2021 को दोपहर 12:46:12 से

बड़ा मंगलवार समापन- 6, 2021 को रात 09:03:15 पर
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बड़ा मंगलवार का महत्व

बड़ा मंगलवार के दिन भक्त व्रत रहेंगे और हनुमान जी की पूजा अर्चना करेंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लखनऊ के नवाब सआदतअली खां काफी बीमार थे, उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए मां छतर कुंवर ने हनुमान जी से मन्नत मांगी थी. उनकी मन्नत पूरी हो गई, तब उन्होंने अलीगंज में हनुमान मंदिर बनवाया था. उसके बाद से ही ज्येष्ठ के मंगलवार को बड़े मंगलवार के तौर पर मनाया जाने लगा.



हनुमान जी आरती:

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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