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Baisakhi 2020: बैसाखी कब है? लॉकडाउन में कैसे मनाया जाएगा यह त्यौहार जानें

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Updated: April 10, 2020, 6:17 AM IST
Baisakhi 2020: बैसाखी कब है? लॉकडाउन में कैसे मनाया जाएगा यह त्यौहार जानें
बैसाखी कब है

बैसाखी २०२० (Baisakhi): अपने-अपने घरों में रहकर ही वाहेगुरु से अरदास करें कि पूरी दुनिया को कोरोना वायरस के शिकंजे से मुक्ति दिलाएं.

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बैसाखी २०२० (Baisakhi): बैसाखी का त्‍योहार इस बार 13 अप्रैल को है. लॉकडाउन के चलते इस बार बैसाखी के त्यौहार पर काफी असर देखने को मिल सकता है. इस बार लोग अपने घरों में ही बैसाखी का त्यौहार मनाएंगे. हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के अनुसार, श्रीगुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह ने बताया है कि इस बार हर बार की तरह गुरुद्वारे में संगत नहीं होगी. साथ ही उन्होंने यह अपील भी की है कि अपने-अपने घरों में रहकर ही वाहेगुरु से अरदास करें कि पूरी दुनिया को कोरोना वायरस के शिकंजे से मुक्ति दिलाएं.

हर साल कुछ ऐसा होता था बैसाखी का जश्न:
बैसाखी के दिन पूरे देश में जश्न का माहौल होता है. लेकिन अगर पंजाब और हरियाणा की बात की जाए तो यहां ढोलनगाड़ों की धुन पर पारंपरिक पोशाक में युवक और युवतियां नाचते-गाते और जश्न मनाते थे. गुरुद्वारों को फूलों से और लाइट से सजाया जाता था. सिख लोग बैसाखी से नए साल की शुरुआत मानते हैं. इसलिए लोग एक दुसरे को बैसाखी की बधाइयां भी देते हैं.

बैसाखी का महत्‍व:



बैसाखी का त्यौहार ज़्यादातर पंजाब, हरियाणा के अलावा उत्तर भारत में मनाया जाता है. इस त्यौहार का संबंध फसलों से है. बैसाखी को फसल कटने के बाद नया साल आने की ख़ुशी में मनाया जाता है. बैसाखी को बंगाल में पोइला बैसाखी कहा जाता है. बंगाली लोग पोइला बैसाख को अपने नए साल की शुरुआत मानते हैं. बैसाखी के दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है इसलिए इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं.



हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हजारों साल पहले बैसाखी के दिन ही गंगा मां का धरती पर अवतरण हुआ था. इसी वजह से इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा रही है. इस दिन गंगा आरती करना भी शुभ माना जाता है. लेकिन इस बार बैसाखी पार लॉकडाउन के चलते ऐसा करना उचित और संभव दोनों ही नहीं है

बैसाखी के दिन ही खालसा पंथ की स्‍थापना:
सिखों के 10वें और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह ने साल 1699 में बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में खालसा पंत की स्थापना की थी. इस दौरान खालसा पंथ की स्‍थापना का उदेश्य लोगों को मुगल शासकों के अत्‍याचारों से मुक्‍त करना था.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: April 10, 2020, 6:17 AM IST
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