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Bhadrapada Amavasya 2022: कब है भाद्रपद अमावस्या? जानें तिथि, मुहूर्त, योग और महत्व

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को भाद्रपद अमावस्या होती है. (Photo:Pixabay)

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को भाद्रपद अमावस्या होती है. (Photo:Pixabay)

भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya) के दिन नदियों में स्नान और उसके बाद दान दक्षिणा देने का महत्व है. जानते हैं भाद् ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

इस माह की अमावस्या शनिवार को है, इसलिए यह शनि अमावस्या भी है.
इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितर और शनि देव दोनों ही प्रसन्न होते हैं.

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya) होती है. इस दिन नदियों में स्नान और उसके बाद दान दक्षिणा देने का महत्व है. इस माह की अमावस्या शनिवार को पड़ रहा है, इसलिए यह शनि अमावस्या भी है. इस दिन शनि देव और पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं. शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं भाद्रपद अमावस्या तिथि, मुहूर्त, योग आदि के बारे में.

भाद्रपद अमावस्या 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार देखा जाए तो भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 26 अगस्त दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है, इस तिथि का समापन 27 अगस्त दिन शनिवार को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट पर होगा.

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उदयातिथि के आधार पर भाद्रपद अमावस्या 27 अगस्त ​शनिवार को है. इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितर और शनि देव दोनों ही प्रसन्न होते हैं.

शिव योग में भाद्रपद अमावस्या
भाद्रपद अमावस्या के दिन शिव योग बना हुआ है. इस दिन प्रात:काल से लेकर अगले दिन 28 अगस्त को 02:07 एएम तक ​शिव योग है. इस योग में किए गए कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं. यह एक शुभ योग है.

इस दिन का शुभ समय 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक है. यह दिन का अभिजीत मुहूर्त है. इस दिन का राहुकाल सुबह 09 बजकर 09 मिनट से सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक है.

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भाद्रपद अमावस्या का महत्व
1. भाद्रपद अमावस्या के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.

2. भाद्रपद अमावस्या को पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं. इस दिन आपको सुबह साढ़े ग्यारह बजे से श्राद्ध कर्म, पिंडदान आदि करना चाहिए.

3. भाद्रपद अमावस्या को स्नान के बाद पितरों को काले तिल, अक्षत् और फूल से तर्पण देना चाहिए, जिससे वे तृप्त हो जाएं.

4. भाद्रपद अमावस्या के दिन शनि अमावस्या भी है. इस दिन काले उड़द, काला तिल, सरसों के तेल आदि का दान करने से शनि दोष दूर होगा.

5. कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए आप भाद्रपद अमावस्या को उपाय कर सकते हैं.

Tags: Dharma Aastha, Religion

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