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Bhauma Pradosh Vrat 2021: शिव जी और बजरंगबली के आशीर्वाद से पूरी होगी मनोकामना , जानें महत्व, पढ़ें आरती

भौम प्रदोष व्रत से शिव जी और बजरंगबली का मिलेगा आशीर्वाद (photo credit: instagram/hindu_samrajya._)
भौम प्रदोष व्रत से शिव जी और बजरंगबली का मिलेगा आशीर्वाद (photo credit: instagram/hindu_samrajya._)

Bhauma Pradosh Vrat 2021 Date: भौम प्रदोष व्रत में भोलेशंकर भगवान शिव (God Shiva) और राम भक्त हनुमान (Hanuman Ji) जी की पूजा का विशेष महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जहां जीवन खुशहाल होता है वहीं हनुमान जी की पूजा करने से शत्रुओं का विनाश होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 26, 2021, 10:58 AM IST
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Bhauma Pradosh Vrat 2021 Date: आज 26 जनवरी को भौम प्रदोष व्रत है. भौम प्रदोष व्रत को मंगल प्रदोष भी कहा जाता है. भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और बजरंगबली को समर्पित माना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त प्रदोष व्रत रखता है उसकी सभी कामनाओं की पूर्ती होती है, मंगल दोष शांत होता है और दरिद्रता का नाश होता है. भौम प्रदोष व्रत में भोलेशंकर भगवान शिव और राम भक्त हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जहां जीवन खुशहाल होता है वहीं हनुमान जी की पूजा करने से शत्रुओं का विनाश होता है. आइए जानें भौम प्रदोष का महत्व और पढ़ें शिव जी एवं बजरंगबली की आरती

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

भौम प्रदोष व्रत की हिंदू धर्म में काफी महिमा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त भौम प्रदोष व्रत पूरी श्रद्धा के साथ करता है भोलेशंकर भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. ऐसे जातकों के जीवन में परेशानियां भी उनका रास्ता नहीं रोक पाती हैं. भौम प्रदोष व्रत करने से जीवन निरोग और सुखी रहता है. भौम प्रदोष व्रत भोलेशंकर के अलावा हनुमान जी को भी समर्पित है ऐसे में जो भी भक्त ये व्रत रखता है उसे मंगल दोष से भी मुक्ति मिलती है और उसे जीवन में समस्त सुखों की प्राप्ति होती है.



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शिव जी की आरती:

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥

बजरंगबली की आरती:
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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