बुद्ध ने शिष्य को बार-बार गंदे पानी के झरने से पानी लेने के लिए भेजा, पढ़िए कहानी

कोई यदि शांति और धीरज से उसे बैठा देखता है रहे, तो मन का मैल अपने आप नीचे बैठ जाता है और आप एक बार फिर साफ दिल से आगे बढ़ते हैं.

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 1:26 PM IST
बुद्ध ने शिष्य को बार-बार गंदे पानी के झरने से पानी लेने के लिए भेजा, पढ़िए कहानी
प्रेरक प्रसंग
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Updated: August 9, 2019, 1:26 PM IST
बुद्ध एक दोपहर वन में वृक्ष के नीचे आराम कर रहे थे. उन्हें प्यास लगी तो आनंद को पास की पहाड़ी वाले झरने पर पानी लेने के लिए भेजा गया.

आनंद ने देखा झरने पर से कुछ बैलगाड़ियां पार हो रही थीं. जिसके कारण मिट्टी ऊपर उठ गई थी. कीचड़ और सड़े पत्ते उसमें उभर कर आ गये थे. उसका पानी गंदा हो गया था. इसे देखकर आनंद पानी बिना लिए लौट आया.

उसने बुद्ध से कहा, “झरने का पानी निर्मल नहीं है. मैं नदी से पानी ले आता हूं. जानता हूं नदी दूर है पर आपके लिए साफ पानी की व्यवस्था हो जाएगी. मैं जल्द से जल्द आने की कोशिश करूंगा”

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बावजूद इसके बुद्ध ने उसे झरने का पानी ही लाने को कहा और वापस लौटा दिया.

आनंद थोड़ी देर में फिर खाली लौट आया. उसे पानी अब भी साफ नहीं लगा. बुद्ध ने उसे इस बार भी वापस लौटा दिया.

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तीसरी बार आनंद जब झरने पर पहुंचा, तो देखकर चौंक गया. झरने का पानी बिलकुल साफ था. वो अब बिलकुल निर्मल और शांत हो गया था. मिट्टी बैठ गई थी और पानी बिलकुल पारदर्शी हो गया था.

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आनंद बुद्ध के पास लौटा और सारी बात बताई. बुद्ध ने आनंद से कहा कि “यही स्थिति हमारे मन की भी है. जीवन की परेशानियां उसे विक्षुब्ध कर जाती हैं, मथ देती हैं. पर कोई यदि शांति और धीरज से उसे बैठा देखता है रहे, तो मन का मैल अपने आप नीचे बैठ जाता है और आप एक बार फिर साफ दिल से आगे बढ़ते हैं.”

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First published: August 9, 2019, 1:10 AM IST
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