होम /न्यूज /धर्म /Budh Pradosh Vrat 2022: कब है भाद्रपद का पहला प्रदोष व्रत? जानें पूजा का शुभ समय

Budh Pradosh Vrat 2022: कब है भाद्रपद का पहला प्रदोष व्रत? जानें पूजा का शुभ समय

हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं. (Photo: Pixabay)

हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं. (Photo: Pixabay)

भाद्रपद मा​ह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भादो का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह बुध प्रदोष व्रत है. आइए जानते हैं ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

बुध प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव अपने भक्त के इच्छाओं की पूर्ति करते हैं.
प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय में करते हैं.

भाद्रपद मा​ह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भादो का पहला प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) रखा जाएगा. यह अगस्त माह का अंतिम प्रदोष व्रत है. हर माह के त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखते हैं और शुभ समय में भगवान शिव की पूजा करते हैं. भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत 24 अगस्त दिन बुधवार  को है, इसलिए यह बुध प्रदोष व्रत है. बुध प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव अपने भक्त के इच्छाओं की पूर्ति करते हैं. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव बता रहे हैं बुध प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त के बारे में.

बुध प्रदोष व्रत 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 24 अगस्त को सुबह 08 बजकर 30 मिनट पर लग रही है और यह तिथि 25 अगस्त को सुबह 10 बजकर 37 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में त्रयोदशी तिथि में प्रदोष पूजा का मुहूर्त 24 अगस्त को प्राप्त हो रहा है, इसलिए बुध प्रदोष व्रत 24 अगस्त को ही रखा जाएगा.

यह भी पढ़ें: कब है भाद्रपद अमावस्या? जानें तिथि, मुहूर्त, योग और महत्व

बुध प्रदोष व्रत 2022 पूजा मुहूर्त
जैसा कि आपको पता है कि प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय में करते हैं. इस वजह से बुध प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 52 मिनट से रात 09 बजकर 04 मिनट तक है. इस समय में आपको भगवान शिव की पूजा कर लेनी चाहिए.

व्रत वाले दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से दोपहर 02:00 बजे तक है. इस दिन अमृत काल सुबह 10 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है. आज के दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है.

यह भी पढ़ें: अजा एकादशी पर बन रहे दो शुभ योग, व्रत से मिलेगा अश्वमेध यज्ञ का फल

प्रदोष व्रत का महत्व
य​ह व्रत देवों के देव महादेव की पूजा के लिए समर्पित है. इस व्रत को करने से रोग, ग्रह दोष, कष्ट, पाप आदि से मुक्ति मिलती है. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से नि:संतान लोगों को पुत्र भी प्राप्त होता है. शिव जी की कृपा से धन, धान्य, सुख, समृद्धि से जीवन परिपूर्ण होता है.

शिव पूजा
प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय में भगवान शिव की पूजा करते हैं. उनको भांग, बेलपत्र, मदार पुष्प, धतूरा, शमी के पत्ते, अक्षत्, चंदन, गंगाजल, गाय का दूध आदि अर्पित करते हैं. पूजा के दौरान आपको बुध प्रदोष व्रत कथा को सुनना चाहिए या फिर पढ़ना चाहिए. इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें