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Chaitra Amavasya 2020: चैत्र अमावस्या पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें पूजन, जानें पौराणिक महत्व

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Updated: March 24, 2020, 6:36 AM IST
Chaitra Amavasya 2020: चैत्र अमावस्या पर आज इस शुभ मुहूर्त में करें पूजन, जानें पौराणिक महत्व
चैत्र अमावस्या आज

चैत्र अमावस्या २०२० (Chaitra Amavasya 2020): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 6:36 AM IST
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चैत्र अमावस्या २०२० (Chaitra Amavasya 2020): आज 24 मार्च को चैत्र अमावस्या है. हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का काफी धर्मिक महत्व माना गया है. चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या कहा जाता है. इसके बाद से विक्रम संवत्सर जिसे कि हिंदू धर्म का नया साल कहा जाता है, लग जाता है. चैत्र अमावस्या के अगले दिन से ही नवरात्रि प्रारंभ हो जाएंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त ...

चैत्र अमावस्या का शुभ समय:
चैत्र अमावस्या 24 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लग जाएगी.
सर्वार्थ सिद्धि योग: आज सुबह 6 बजकर 20 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 19 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. मान्यता के अनुसार, यह योग काफी शुभ होता है. ऐसा भी माना जाता है कि इस योग में किए गए शुभ काम फलदायी होते हैं.



अभिजित मुहूर्त: यह मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.

चैत्र अमावस्या पर इस विधि से करें पूजा-अर्चना:

चैत्र अमावस्या के दिन सुबह जल्दी बिस्तर त्याग दें. इसके बाद प्रातः ही किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें. यदि यह सुविधा न मिल पाए तो नहाने के पानी में गंगा जल मिला लें

इसके बाद जब सूर्य देव उदय हों तो उन्हें प्रणाम कर जल अर्पित करें और ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें.

पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए विधिवत तरीके से धार्मिक कर्मकांड पूरे करें. इसके बाद पितरों को तर्पण दें.

पूजा सम्पन्न होने के पश्चात ब्राह्माण देवता और जरूरतमन्दों को अपनी इच्छानुसार दान और दाक्षिणा दें.

चैत्र अमावस्या की महिमा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,चैत्र अमावस्या का व्रत रखने से पितरों की आत्मा शांत होती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है. इसलिए यह पूर्वजों को समर्पित मानी जाती है. जो जातक पितृ दोष से परेशान हैं अगर वो यह व्रत रखते हैं और श्राद्ध और तर्पण देते हैं तो उनका यह दोष कट जाता है. इसके साथ ही पूर्वज मुक्ति को प्राप्त होते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 24, 2020, 6:17 AM IST
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