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चैत्र नवरात्रि 2020: नवरात्रि के 9 दिनों में मां शक्ति की ऐसे करें पूजा, कलश स्थापना के बाद पढ़ें ये मंत्र

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Updated: March 21, 2020, 6:52 AM IST
चैत्र नवरात्रि 2020: नवरात्रि के 9 दिनों में मां शक्ति की ऐसे करें पूजा, कलश स्थापना के बाद पढ़ें ये मंत्र
इस बार चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से शुरू हो रही है जिसकी समाप्ति 02 अप्रैल को होगी.

नवरात्रि के दिनों में नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्‍वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है.

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  • Last Updated: March 21, 2020, 6:52 AM IST
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नवरात्रि के दौरान मां शक्ति की उपासना का खास महत्‍व होता है. साल भर में चार नवरात्रि होते हैं. इसमें दो नवरात्रि गुप्‍त होते हैं और अन्‍य दो में वासंतिक (चैत्र) और शारदीय नवरात्रि होते हैं. इसमें पूजा का खास व‍िधान है. इन दोनों ही नवरात्रियों में यदि 9 दिनों तक धर्मशास्‍त्रों में बताई गई विधि से देवी दुर्गा की पूजा की जाए तो भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. इस बार चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से शुरू हो रही है जिसकी समाप्ति 02 अप्रैल को होगी. आइए आपको बताते हैं क्‍या है नवरात्रि की पूजा विधि.

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मां की मूर्ति या फोटो लगाएं
नवरात्रि के दिनों में नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्‍वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. इसके लिए धर्मशास्‍त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहा धोकर घर के पूजा स्‍थल को अच्‍छे से साफ कर लें. इसके बाद मां की मूर्ति या फोटो लगाएं. उस पर लाल रंग की चुनरी डालें. पूजा स्‍थल को लाल रंग के फूलों से सजाएं. इसके बाद ऋतुफल और मिठाई अर्पित करें. ध्‍यान रखें कि अगर नवरात्रि का पहला दिन है तो इस विधि के बाद कलश स्‍थापित करना न भूलें.



कलश को मिट्टी या बालू पर रखें
नवरात्रि में कलश स्‍थापना का विशेष महत्‍व होता है. ध्‍यान रखें कि कलश हमेशा मूर्ति की दाई तरफ ही रखें. इसके अलावा जहां पर कलश की स्‍थापना करनी हो उस स्थान पर मिट्टी या बालू का ढेर बनाकर उसके बाद इसे लगाएं. उस पर ही कलश को स्‍थापित करें लेकिन ध्‍यान रखें कि मिट्टी या बालू का ढेर कलश से थोड़ा ज्‍यादा हो. आपको बता दें कि कलश मिट्टी का या फिर पीतल का होना चाहिए. कलश के ऊपर स्‍वास्तिक जरूर बनाएं. इसके अलावा कलश के ऊपरी हिस्‍से पर मौली बांधकर उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें. इसके बाद उसमें शुद्ध जल भरें.

माथे पर तिलक लगाकर पूजा शुरू करें
जल से भरे कलश में एक या दो रुपए का सिक्‍का डालकर उसमें आम का पल्‍लव लगा दें. इसके बाद उसके ऊपर एक कटोरी रखें. यह मिट्टी, पीतल या फिर स्‍टील किसी भी धातु की हो सकती है. अब उसमें अक्षत रखें. उसके ऊपर चुनरी लपेटा हुआ कच्‍चा नारियल रख दें. ध्‍यान रखें कि मातारानी को लाल रंग बहुत प्रिय है तो चुनरी भी लाल रंग की ही लपेटें. जिस मिट्टी या बालू के ऊपर कलश स्‍थापित किया है उसमें देवी मां को नमन करते हुए जौ बो दें. इसके बाद माथे पर रोली का तिलक लगाकर पूजा शुरू करें. ध्‍यान रखें कभी बिना तिलक लगाए पूजा न करें.

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दुर्गा कवच का पाठ करें
नवरात्रि में भी सबसे पहले गणपति बप्‍पा को नमन करें. इसके बाद मंत्र ‘ऊं एम् हृीं क्लिं चामुण्‍डायै विच्‍चे’ का उच्‍चारण करें और पूजा प्रारंभ करें. सबसे पहले दुर्गा कवच का पाठ करें. इसके बाद अर्गला, कीलक और रात्रि सूक्‍तक का पाठ करें. जब इन सभी का पाठ कर लें तो दुर्गा सप्‍तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करके मां भवानी की आरती करें. अंत में क्षमा प्रार्थना जरूर कर लें. 9 दिनों तक पूजन का यही क्रम रखें. ध्‍यान रखें कि कभी भी पूजा-पाठ या व्रत करते हैं तो मन में किसी के भी प्रति ईर्ष्‍या-द्वेष न आने दें.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 21, 2020, 6:52 AM IST
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