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चैत्र नवरात्रि 2020: पंचमी पर करें मां स्कंदमाता की पूजा, पढ़ें कथा और आरती

News18Hindi
Updated: March 29, 2020, 6:53 AM IST
चैत्र नवरात्रि 2020: पंचमी पर करें मां स्कंदमाता की पूजा, पढ़ें कथा और आरती
नवरात्रि के पांचवें दिन देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा होती है.

आज पंचमी है. इस दिन मां स्कन्दमाता की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन मां को जौ-बाजरे का भोग लगाया जाता है.

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  • Last Updated: March 29, 2020, 6:53 AM IST
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नवरात्रि (Navratri) के पांचवें दिन यानी पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता (Skandmata) की पूजा अर्चना की जाती है. आज पंचमी है. इस दिन मां स्कन्दमाता की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन मां को जौ-बाजरे का भोग लगाया जाता है. वहीं शारीरिक कष्टों के निवारण के लिए मां को केले का भी भोग लगाया जाता है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है. भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं. मां की चार भुजाएं हैं जिसमें दोनों हाथों में कमल के फूल हैं. देवी स्कन्दमाता ने अपने एक हाथ से कार्तिकेय को अपनी गोद में बैठा रखा है और दूसरे हाथ से वह अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं.

मां स्कन्दमाता का मंत्र


सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.



शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥


ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

संतान प्राप्ति हेतु जपें स्कन्द माता का मंत्र


'ॐ स्कन्दमात्रै नम:..'

इस मंत्र से भी मां की आराधना की जाती है

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..

आज के दिन मां स्कन्दमाता की पूजा एकाग्र मन से करने से सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. जिन लोगों को संतान प्राप्त नहीं हो रही है या जिन्हें संतान प्राप्ति में अधिक समस्या उत्पन्न हो रही है वे नवरात्र में मां की पूजा कर सकते हैं. मां की पूजा करने से संतान संबंधी सभी परेशनियां समाप्त होती हैं. कमजोर बृहस्पति को भी मजबूत करने के लिए स्कन्दमाता की पूजा की जाती है. इसके अलावा मां की पूजा से गृह कलेश भी दूर होते हैं.

स्कन्दमाता की पूजा विधि
सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद मां स्कन्दमाता की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें और फिर कलश की स्थापना करें. उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका भी स्थापित करें. आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें. हाथ में फूल लेकर 'सिंहासनागता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी' मंत्र का जाप करते हुए फूल चढ़ाएं. मां की विधिवत पूजा करें, मां की कथा सुनें और मां की धूप और दीप से आरती उतारें. उसके बाद मां को केले का भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में केसर की खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.

कथा
नवरात्रि के पांचवें दिन देवताओं के सेनापति कुमार कार्तिकेय की माता की पूजा होती है. कुमार कार्तिकेय को ग्रंथों में सनत-कुमार, स्कंद कुमार के नाम से पुकारा गया है. माता इस रूप में पूर्णत: ममता लुटाती हुई नजर आती हैं. माता का पांचवां रूप शुभ्र अर्थात श्वेत है.

जब अत्याचारी दानवों का अत्याचार बढ़ता है तब माता संत जनों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का अंत करती हैं. देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं, माता अपने दो हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक भुजा में भगवान स्कंद या कुमार कार्तिकेय को सहारा देकर अपनी गोद में लिए बैठी हैं. मां का चौथा हाथ भक्तो को आशीर्वाद देने की मुद्रा मे है.

देवी स्कंद माता ही हिमालय की पुत्री पार्वती हैं. इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है. यह पर्वत राज की पुत्री होने से पार्वती कहलाती हैं. महादेव की वामिनी यानी पत्नी होने से माहेश्वरी कहलाती हैं और अपने गौर वर्ण के कारण देवी गौरी के नाम से पूजी जाती हैं. माता को अपने पुत्र से अधिक प्रेम है अत: मां को अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है. जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते हैं, मां उस पर अपने पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं.

भोले शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता ने महान व्रत किया. उस महादेव की पूजा भी आदर पूर्वक करें क्योंकि इनकी पूजा न होने से देवी की कृपा नहीं मिलती है. श्री हरि की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ ही करनी चाहिए.

स्कंदमाता की आरती:

जय तेरी हो अस्कंध माता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहू मैं
हरदम तुम्हे ध्याता रहू मैं
कई नामो से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कहीं पहाड़ों पर है डेरा
कई शेहरों मैं तेरा बसेरा
हर मंदिर मैं तेरे नजारे
गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इन्दर आदी देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये
तुम ही खंडा हाथ उठाये
दासो को सदा बचाने आई
'चमन' की आस पुजाने आई.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 28, 2020, 11:34 PM IST
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