Chaitra Navratri, Maha Ashtami: नवरात्रि अष्टमी पर करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र और महत्व

मां महागौरी सुख और शान्ति देती हैं.

मां महागौरी सुख और शान्ति देती हैं.

Chaitra Navratri, Maha Ashtami- Navratri 8th Day, Mahagauri Puja Vidhi Timing Importance Mantra- महागौरी की पूजा करने से लोगों के पापों का नाश होता है. महागौरी ने घोर तपस्या कर गौर वर्ण प्राप्त किया था. मां महागौरी की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 9:27 AM IST
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Navratri 8th Day, Mahagauri Puja Vidhi Timing Importance Mantra- आज चैत्र नवरात्रि की अष्टमी है. धार्मिक लिहाज से नवरात्रि की अष्टमी तिथि की बहुत महिमा होती है. आज भक्तों ने मां दुर्गा के आठवें स्वरुप महागौरी की पूजा-अर्चना की. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब महागौरी की उत्पत्ति हुई उस समय उनकी उम्र आठ साल थी इसलिए इनकी पूजा अष्टमी के दिन की जाती है. ये देवी सदा सुख और शान्ति देती है. अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप है. इसलिए मां के भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं.

महागौरी का स्वरुप:

यह भी मान्यता है कि महागौरी की पूजा करने से लोगों के पापों का नाश होता है. महागौरी ने घोर तपस्या कर गौर वर्ण प्राप्त किया था. अतः इन्हें उज्जवल स्वरूप की महागौरी धन, ऐश्वर्य देने वाली, तीनों लोक में पूजी जाने वाली मंगला मूर्ति, मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया है. यह धन-वैभव और सुख-शान्ति की अधिष्ठात्री देवी है. सांसारिक रूप में इसका स्वरूप बहुत ही उज्जवल, कोमल, सफेद वर्ण तथा सफेद वस्त्रधारी चतुर्भुज युक्त एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू लिए हुए गायन संगीत की प्रिय देवी है, जो सफेद वृषभ यानि बैल पर सवार हैं.

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मां महागौरी की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है. उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हैं. महागौरी का प्रिय भोग- नवरात्रि के आठवें दिन माता को नारियल का भोग लगाएं व नारियल का दान कर दें. इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है.

महागौरी का बीजमंत्र:

"सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके.



शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते.

अर्थः- नारायणी! तुम सब प्रकार का मङ्गल प्रदान करनेवाली मङ्गलमयी हो.कल्याणदायिनी शिवा हो. सब पुरुषार्थो को सिद्ध करनेवाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रोंवाली एवं गौरी हो. तुम्हें नमस्कार है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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