Chaitra Navratri 2021: आज है चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत का यदि विधिवत पारण न किया जाए तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. Image-shutterstock.com

मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत का यदि विधिवत पारण न किया जाए तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. Image-shutterstock.com

Chaitra Navratri 2021: चैत्र नवरात्रि में विधि पूर्वक मां दुर्गा (Maa Durga) की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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  • Last Updated: April 22, 2021, 6:28 AM IST
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Chaitra Navratri 2021: चैत्र मास में नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है. नवरात्रि पर मां दुर्गा के अलग-अलग 9 रूपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है और वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं. चैत्र नवरात्रि में विधि पूर्वक मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. चैत्र नवरात्रि का पर्व 13 अप्रैल को चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा की तिथि से आरंभ हुआ था. नवमी की तिथि में नवरात्रि के पर्व का समापन कन्या पूजन और हवन के साथ किया जाता है. इसके बाद दशमी तिथि को नवरात्रि व्रत का पारण होता है. कल 22 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण है. आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण

चैत्र नवरात्रि की पूजा घटस्थापना से विधिवत शुरू हुई थी. नवरात्रि के पर्व में आरंभ और पारण का विशेष ध्यान रखा जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत का यदि विधिवत पारण न किया जाए तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है. इसलिए पारण का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार चैत्र नवरात्रि व्रत पारण नवमी तिथि के समाप्त होने के बाद और दशमी तिथि प्रारंभ होने पर किया जाता है.

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चैत्र नवरात्रि पारण की तिथि और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि पारण तिथि- 22 अप्रैल 2021 (गुरुवार)

नवमी तिथि प्रारंभ- 21 अप्रैल (बुधवार) दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से.



नवमी तिथि समापन- 22 अप्रैल (गुरुवार) दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक.

दशमी तिथि प्रारंभ- 22 अप्रैल (गुरुवार) दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से.

नवरात्रि व्रत की पारण विधि

पारण को लेकर अलग-अलग तिथियों के प्रयोग की परंपरा है. कुछ भक्त नवरात्रि के व्रत का पारण अष्टमी की तिथि में करते हैं. इस तिथि को महाअष्टमी भी कहा जाता है. वहीं कुछ लोग नवमी की तिथि में मां सिद्धिदात्री की पूजा करने के बाद कन्या पूजन और हवन कर व्रत का पारण करते हैं. लेकिन पारण के लिए नवमी तिथि के अस्त होने से पहले का समय ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है. इसके साथ ही दशमी की तिथि को भी उपयुक्त माना जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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